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वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में राजनाथ सिंह बोले, विकसित भारत की यात्रा में क्षेत्रीय उद्योगों की अहम भूमिका

Rajnath Singh speaks at the Vibrant Gujarat Summit; highlights the crucial role of regional industries in the journey towards a developed India.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में क्षेत्रीय उद्योगों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से सशक्त राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है। इसके लिए जरूरी है कि क्षेत्रीय क्षमताओं को राष्ट्रीय ताकत में बदला जाए और स्थानीय नवाचारों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक पहुंचाया जाए।

रक्षा मंत्री मंगलवार को वडोदरा में आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ में उद्योगपतियों, उद्यमियों, युवा इनोवेटर्स और शिक्षाविदों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और गुजरात सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा भी मौजूद रहीं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में भारत की भूमिका उसकी आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और सामूहिक संकल्प से तय होगी। उन्होंने कहा कि महान राष्ट्र तीन प्रमुख स्तंभों, आर्थिक मजबूती, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा, पर खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास देश की सुरक्षा को मजबूती देते हैं, जबकि सुरक्षित वातावरण उद्योग और नवाचार के विकास के लिए जरूरी होता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र का विकास केवल हथियारों और सैन्य तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़े औद्योगिक इकोसिस्टम को गति देता है। डिफेंस कॉरिडोर, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, रोजगार और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के माध्यम से देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। भारत कभी अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, अब रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी प्लेटफॉर्म, निजी क्षेत्र की भागीदारी और स्टार्टअप्स के योगदान ने देश में मजबूत रक्षा इकोसिस्टम तैयार किया है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, रक्षा खरीद प्रक्रिया में सुधार, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड, आईडेक्स, सृजन पोर्टल और अन्य पहलों के जरिए छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि देश का रक्षा उत्पादन वर्ष 2014 में करीब 46 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर अब रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वहीं रक्षा निर्यात भी 1,000 करोड़ रुपए से कम के स्तर से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं है। इसका मतलब है कि भारत अपनी क्षमताओं के आधार पर मजबूत बने और वैश्विक साझेदारों के साथ बराबरी के स्तर पर सहयोग करे। उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त उपक्रम और सहयोग को बढ़ावा दे रही है।

गुजरात की औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि राज्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास का बड़ा केंद्र बन सकता है। उन्होंने वडोदरा में टाटा-एयरबस के सी-295 परिवहन विमान निर्माण केंद्र और गुजरात में तैयार किए जा रहे के-9 वज्र स्वचालित तोप प्रणाली का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि साणंद और धोलेरा में विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव बनेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में गुजरात की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

राजनाथ सिंह ने कहा कि गुजरात का मजबूत रसायन, पेट्रोकेमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बंदरगाह और जहाज निर्माण क्षेत्र रक्षा उद्योग को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की पूरी क्षमता मौजूद है और गुजरात के युवा व उद्यमी इसमें अहम योगदान दे सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने डिफेंस और एयरोस्पेस उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों से संवाद किया। उन्होंने निजी उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के प्रयासों की सराहना की और रक्षा विनिर्माण को मजबूत बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट’ की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। आज यह व्यापार, निवेश, ज्ञान साझेदारी और सतत विकास के लिए दुनिया के प्रमुख मंचों में शामिल हो चुका है। इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए गुजरात सरकार क्षेत्रीय सम्मेलनों का आयोजन कर रही है, जिनका उद्देश्य स्थानीय क्षमताओं को ‘विकसित भारत 2047’ और ‘विकसित गुजरात 2047’ के लक्ष्य से जोड़ना है।

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