N1Live National जनजाति बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ा रहा राजसमंद का सरकारी छात्रावास, बना शिक्षा और संस्कृति का साझा मंच
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जनजाति बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ा रहा राजसमंद का सरकारी छात्रावास, बना शिक्षा और संस्कृति का साझा मंच

Rajsamand's government hostel is boosting the confidence of tribal girls, becoming a common platform for education and culture.

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित चंद्रदीप कॉलोनी का राजकीय जनजाति बालिका आवासीय महाविद्यालय इन दिनों केवल शिक्षा का ही नहीं, बल्कि संस्कृति के आदान-प्रदान का भी एक सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां रह रही आदिवासी अंचल की छात्राएं न केवल शैक्षणिक गतिविधियों में आगे बढ़ रही हैं, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और अपनाने का अवसर भी पा रही हैं।

भारत में संस्कृति का आदान-प्रदान सदियों पुरानी परंपरा रही है। अलग-अलग प्रांतों के लोग जब एक-दूसरे की कला, नृत्य, संगीत और रहन-सहन से रूबरू होते हैं, तो आपसी समझ और सौहार्द और गहरा होता है। यही परंपरा राजसमंद के इस सरकारी छात्रावास में भी देखने को मिल रही है। महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्राएं सप्ताह भर की पढ़ाई और दिनचर्या की थकान को मिटाने के लिए शनिवार और रविवार को लोक नृत्य, गीत-संगीत और खेलकूद जैसी गतिविधियों में भाग लेती हैं।

आदिवासी अंचल से आई छात्राएं अपने पारंपरिक लोक नृत्य और गीत अन्य छात्राओं को सिखाती हैं, वहीं दूसरी ओर वे भी नई संस्कृतियों और कलाओं से परिचित हो रही हैं। यह प्रक्रिया केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे छात्राओं का मानसिक और शारीरिक विकास भी हो रहा है। लोक नृत्य के माध्यम से जहां शरीर स्वस्थ रहता है, वहीं सामूहिक गतिविधियों से मन भी प्रसन्न और तनावमुक्त होता है।

छात्रावास में आयोजित खेलकूद और गीत गायन प्रतियोगिताएं आपसी प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ टीम भावना को भी मजबूत कर रही हैं। इन सभी गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव छात्राओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर साफ दिखाई देता है।

इस पूरे उपक्रम में छात्रावास की वार्डन प्रतिभा त्रिवेदी की भूमिका भी सराहनीय है। वे छात्राओं के साथ एक अभिभावक और पारिवारिक सदस्य की तरह व्यवहार करती हैं, जिससे बच्चियों को अपनापन और सुरक्षा का एहसास होता है। संगीत की धुनों पर नाचती-गाती ये छात्राएं अब इस छात्रावास को अपना दूसरा घर मानने लगी हैं।

राजसमंद के इस सरकारी छात्रावास में संस्कृति के आदान-प्रदान की यह अनूठी पहल न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक समृद्धि भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। छात्रावास की वार्डन प्रतिभा त्रिवेदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अभी यहां पर 65 बच्चे हैं और 75 की सीट है। पूरे सप्ताह भर की थकान मिटाने के लिए शनिवार को खेल का आयोजन कराया जाता है। कई तरह के कोर्स भी चलाए जाते हैं, जिसमें इनको काफी कुछ सीखने को मिलता रहता है।

छात्रा चंपा कुमारी ने बताया कि हम लोगों को तो काफी कुछ सीखने को मिलता है। कार्यक्रम में सभी छात्राएं एक साथ रहती हैं, जिससे हम लोगों को काफी अच्छा लगता है। छात्रा कस्तूरी गरासिया ने बताया कि हम 2 साल से यहां पर हैं। यहां पर हम लोगों का काफी ध्यान दिया जाता है। हर शनिवार को कार्यक्रम और खेल का आयोजन कराया जाता है जिससे हम लोगों को काफी कुछ नया सीखने को मिलता है।

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