प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) द्वारा कथित तौर पर अत्यधिक बढ़ी हुई कीमतों पर जमीन खरीदने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने मोहाली एसएसपी को जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। एजेंसी की जांच सरकारी कलेक्टर दरों पर आधारित है, जो वास्तविक बाजार कीमतों से भिन्न हो सकती हैं।
अपनी रिपोर्ट में, ईडी ने कहा कि अजनाला और बठिंडा के सब-रजिस्ट्रारों की जांच में पाया गया कि पीसीए ने अजनाला (अमृतसर) में 155 कनाल और 15.5 मरला जमीन और बठिंडा में 100 कनाल और 10 मरला जमीन कुल 77,99,03,563 रुपये (लगभग 78 करोड़ रुपये) में खरीदी थी।
रिपोर्ट के अनुसार, पीसीए ने बठिंडा में एक भूखंड के लिए 19,76,94,500 रुपये का भुगतान किया, जो प्रति कनाल 19,67,109 रुपये के बराबर है, जबकि सरकारी कलेक्टर दर 5 लाख रुपये प्रति कनाल या कुल 5,02,50,000 रुपये थी। ईडी ने कहा कि खरीद मूल्य सरकारी दर से लगभग 3.93 गुना अधिक था और 2024-25 के दौरान इस क्षेत्र में एक ही भूमि लेनदेन के लिए चुकाई गई अब तक की सबसे अधिक राशि थी।
ईडी ने अमृतसर में भी इसी तरह की अनियमितता का आरोप लगाया, जहां दो फर्मों ने स्थानीय किसानों से जमीन खरीदी और कुछ ही महीनों के भीतर उसके कुछ हिस्सों को पीसीए को काफी अधिक कीमतों पर बेच दिया। रिपोर्ट के अनुसार, एक फर्म ने स्थानीय किसानों से 61 कनाल और 2 मरला जमीन 1.36 करोड़ रुपये में खरीदी, यानी लगभग 2.22 लाख रुपये प्रति कनाल। 16 फरवरी, 2026 को, इसने पीसीए को 32 कनाल और 4 मरला जमीन 12.03 करोड़ रुपये में बेच दी, यानी लगभग 37.4 लाख रुपये प्रति कनाल।
दूसरी फर्म ने अगस्त और नवंबर 2025 के बीच स्थानीय भूस्वामियों से 224 कनाल और 2 मरला जमीन 5.56 करोड़ रुपये (लगभग 2.48 लाख रुपये प्रति कनाल) में खरीदी। फरवरी 2026 में, इसने 123 कनाल और 11.5 मरला जमीन पीसीए को 46.18 करोड़ रुपये (लगभग 37.4 लाख रुपये प्रति कनाल) में बेच दी।
ईडी ने बताया कि दोनों फर्मों ने लगभग 285 कनाल जमीन 6.92 करोड़ रुपये में खरीदी और तीन से छह महीनों के भीतर 155 कनाल और 15.5 मरला जमीन पीसीए को 58.22 करोड़ रुपये में बेच दी। एजेंसी ने दावा किया कि पीसीए ने फर्मों द्वारा मूल रूप से भुगतान की गई कीमत से लगभग 15.4 गुना अधिक भुगतान किया।
जांच में कंपनियों के बैंक खातों की भी छानबीन की गई। ईडी ने बताया कि पीसीए से प्राप्त धनराशि जमा होने के कुछ ही समय बाद स्थानांतरित या निकाल ली गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, पीसीए ने एक फर्म को स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) को छोड़कर 11,91,44,025 रुपये का भुगतान किया, और पूरी राशि दो महीने के भीतर निकाल ली गई। प्राप्त धनराशि में से तीन व्यक्तियों को बड़ी मात्रा में भुगतान किया गया।
पीसीए ने दूसरी फर्म को टीडीएस को छोड़कर 45,72,42,947 रुपये का भुगतान किया, जिसमें से 45 करोड़ रुपये दो साझेदारों को 22.5 करोड़ रुपये की बराबर राशि में हस्तांतरित किए गए। एक अन्य लेनदेन में, टीडीएस को छोड़कर 19,57,17,555 रुपये विक्रेता के तीन खातों में जमा किए गए आठ चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान किए गए। ईडी ने कहा कि अधिकांश धनराशि विभिन्न व्यक्तियों को हस्तांतरित की गई, जबकि 44.60 लाख रुपये नकद निकाले गए।
ईडी ने बीएनएस की धारा 61(2) और 318(4) का हवाला देते हुए निष्कर्ष निकाला कि इन लेन-देनों से आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की आशंका है। उसने कथित अपराधों की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

