May 5, 2026
National

बीमार पिता से मिलने को लेकर राशिद शेख को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश में किया बदलाव

Relief for Rashid Sheikh regarding meeting his ailing father, Delhi High Court modified the order

5 मई । दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद बारामूला सांसद अब्दुल राशिद शेख (इंजीनियर राशिद) को लेकर पहले दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश में थोड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने उन्हें अपने पिता से एम्स में जाकर मिलने की अनुमति दे दी है।

पहले कोर्ट ने 28 अप्रैल को इंजीनियर राशिद को एक हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी ताकि वह श्रीनगर जाकर अपने बीमार पिता से मिल सकें। लेकिन बाद में स्थिति बदल गई क्योंकि उनके पिता को श्रीनगर से दिल्ली के एम्स में भर्ती करा दिया गया। इसके बाद राशिद की तरफ से कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की गई जिसमें कहा गया कि अब उन्हें दिल्ली में ही अपने पिता से मिलने की अनुमति दी जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने राशिद की ओर से एक किराए के मकान का स्थानीय पता भी कोर्ट में पेश किया, लेकिन कोर्ट ने इस पर भरोसा नहीं जताया। अदालत ने साफ कहा कि इस स्तर पर किसी नए पते की जांच शुरू करना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब वह पता उनके किसी रिश्तेदार या परिचित का भी नहीं है।

इसी वजह से कोर्ट ने अपना पुराना आदेश थोड़ा बदल दिया। अब इंजीनियर राशिद को जेल से बाहर रहने की पूरी छूट नहीं दी गई है, बल्कि उन्हें रोज अपने पिता से मिलने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने कहा कि वह 10 मई तक सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक अपने पिता से मिल सकते हैं, लेकिन यह मुलाकात जेल से बाहर रहते हुए नहीं होगी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के तहत होगी।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि इस दौरान राशिद के साथ कम से कम दो पुलिसकर्मी सादी वर्दी में मौजूद रहेंगे, जो वार्ड के बाहर तैनात रहेंगे ताकि सुरक्षा बनी रहे और किसी तरह की अनियमितता न हो।

इसके अलावा, अदालत ने साफ किया कि पहले लगाई गई सभी शर्तें अभी भी लागू रहेंगी। यानी यह राहत सीमित समय और विशेष परिस्थिति के लिए ही है। जैसे ही तय समय सीमा खत्म होगी, इंजीनियर राशिद को वापस जेल में ही रहना होगा। वे फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं।

गौरतलब है कि इंजीनियर राशिद 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट से सांसद चुने गए थे। लेकिन 2019 से ही वे जेल में हैं। उन पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 2017 के कथित टेरर फंडिंग केस में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत मामला दर्ज किया था।

उनकी नियमित जमानत की अर्जी ट्रायल कोर्ट ने 21 मार्च 2025 को खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने अपने बीमार पिता के आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की, लेकिन वह भी 24 अप्रैल को यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि उन पर गवाहों को प्रभावित करने के आरोप हैं, जिसमें एक संरक्षित गवाह भी शामिल बताया गया है।

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