July 10, 2026
National

बाबा विश्वनाथ मंदिर में काशीवासियों को मिली खास सुविधा, अब ‘काशी द्वार’ से सीधे वीआईपी दर्शन

Residents of Kashi get a special facility at the Baba Vishwanath Temple: now, direct VIP darshan via the ‘Kashi Dwar’.

10 जुलाई । उत्तर प्रदेश सरकार ने काशी के लोगों के हित में फैसला लेते हुए, उन्हें बाबा विश्वनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन की सुविधा देने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब ‘काशी द्वार’ के जरिए पूरे दिन काशी के स्थानीय लोग अपना आधार कार्ड दिखाकर बाबा विश्वनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन कर सकते हैं।

सरकार के इस फैसले को लेकर काशीवासियों ने बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन की नई सुविधा का स्वागत किया और शुक्रवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए काशी के कुछ स्थानीय लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी, जो बाबा विश्वनाथ मंदिर में महाकाल का दर्शन करने के लिए आए हुए थे। उन्हीं में से एक मन्जू मिष्रा ने कहा कि यह नई पहल सराहनीय है। इसके लिए उन्होंने योगी सरकार को आभार व्यक्त किया और कहा कि काशी के होने के बावजूद काशी वासी बाबा विश्वनाथ के दर्शन नहीं कर पाते थे, जो अब संभव है।

एक अन्य काशीवासी ने बताया कि योगी सरकार की यह नई पहर काशी वासियों के लिए एक तोहफा है। उन्होंने कहा कि काशी के लोग चाह कर भी बाबा का दर्शन नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कहा कि काशी में दूर-दराज से हजारों-लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में काशी वासी को मौका नहीं मिल पाता था।

उन्होंने कहा कि नए नियम के लागू होने से बाबा का दर्शन करना बहुत सुलभ हो गया है। मंदिर परिसर के अंदर भीड़-भाड़ भी नियंत्रित हैं। यह व्यवस्था बहुत की अच्छी और सराहनीय है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिल से धन्यवाद देता हूं।

एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि पहले सुबह 4 से 5 के बीच ही काशी काशीवासियों को स्पर्श दर्शन करने का मौका मिलता था, जिसमें अत्यधिक भीड़ के कारण लोगों को काफी परेशानी होती थी और अधिकांश को तो दर्शन भी नहीं मिल पाता था। ऐसे में यह नई व्यवस्था बहुत अच्छी है। अब काशी काशीवासी अपने आधार कार्ड के माध्यम से सुबह 4 बजे से रात के 11 बजे तक बाबा विश्वनाथ का वीआईपी दर्शन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा लाभ काशी के वृद्ध और महिलाओं को मिला है, जो भीड़-भाड़ की वजह से बाबा का दर्शन नहीं कर पाते थे।

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