N1Live Entertainment ‘कमर्शियल एक्टर्स’ पर ऋचा चड्ढा ने उठाए सवाल, बोलीं- कुछ कहानियों के लिए बड़े चेहरों की जरूरत नहीं होती
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‘कमर्शियल एक्टर्स’ पर ऋचा चड्ढा ने उठाए सवाल, बोलीं- कुछ कहानियों के लिए बड़े चेहरों की जरूरत नहीं होती

Richa Chadha questions 'commercial actors', says some stories don't require big names

18 अप्रैल । एक्ट्रेस-प्रोड्यूसर ऋचा चड्ढा अक्सर खुलकर कई मुद्दों पर बात करती और अपनी राय रखती नजर आती हैं। इसी कड़ी में उन्होंने सवाल उठाया है कि इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स लगातार ‘कमर्शियल’ एक्टर्स को क्यों कास्ट करते हैं? उनका कहना है कि ऐसे एक्टर्स उन कहानियों के लिए न तो बॉक्स-ऑफिस तक दर्शकों को ला पाते हैं और न ही इंडी फिल्म को फेस्टिवल में कोई साख दिला पाते हैं।

ऋचा ने एक बयान में कहा, “अगर कोई एक्टर शुक्रवार को आपकी फिल्म को थिएटर में ओपनिंग नहीं दिला पाता और न ही फेस्टिवल्स में कोई खास वजन जोड़ पाता है, तो फिर एक इंडिपेंडेंट फिल्म में उसे कास्ट करने का आखिर फायदा क्या है?”

एक्ट्रेस ने कहा कि वह किसी पर कोई आरोप नहीं लगा रही हैं, लेकिन “कम से कम ट्रेंड एक्टर्स के साथ आपको यह भरोसा रहता है कि उनकी परफॉर्मेंस की क्वालिटी बनी रहेगी। इंडी फिल्मों के पीछे भी कमर्शियल सोच होती है, कुछ कहानियों को भीड़ खींचने के लिए हमेशा इतने बड़े चेहरों की जरूरत नहीं होती। ऐसे एक्टर को हायर करना ज्यादा किफायती होता है जो कम बजट में भी फिल्म को साख दिला सके।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी भी एक्टर की काबिलियत या अहमियत को कम न करते हुए, मेरा मकसद यह है कि अगर इंडी फिल्मों को 2026 में सचमुच टिके रहना है, तो हमें यह समझना और सीखना होगा कि दर्शक अच्छी कहानियां देखना चाहते हैं, ऐसे काबिल एक्टर्स के साथ जो बजट पर भारी न पड़ें, क्योंकि उनके साथ आने वाले लोगों का खर्च भी तो उठाना पड़ता है।”

ऋचा ने इस बात पर जोर दिया कि इंडिपेंडेंट सिनेमा की बुनियाद हमेशा से ही रिस्क लेने, असलियत और मजबूत कहानी कहने पर टिकी रही है।

उन्होंने कहा, “इंडी फिल्मों का मकसद नई आवाजों, एक्टर्स, लेखकों और टेक्नीशियन्स को सामने लाना होता है, जो फिल्म में कुछ नयापन और ईमानदारी ला सकें। जब फिल्म मेकर्स ‘कमर्शियल वैल्यू’ के भ्रम में कास्टिंग के मामले में समझौता करते हैं, तो फिल्म अपनी रूह खो देती है।”

एक्ट्रेस ने आगे कहा कि 1980 के दशक में “हमारे यहां इंडी सिनेमा का एक जबरदस्त दौर था, और फारूक शेख, अमोल पालेकर, शबाना आजमी जैसे दिग्गज एक्टर्स अपने आप में बड़े सितारे थे। आज वह जगह पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। अगर पूरी इंडस्ट्री सिर्फ 5 बड़े मेल एक्टर्स के इशारे का इंतजार करती रहेगी, जो पहले से ही बहुत थके हुए और बिजी हैं और जिनके कंधों पर आप अपनी फिल्में चलाना चाहते हैं तो आपको मेरी तरफ से ‘ऑल द बेस्ट’ क्योंकि इसका सीधा सा मतलब है कि फिल्मों का प्रोडक्शन बहुत कम हो जाएगा।”

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