राजस्थान में एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले फतेहाबाद के एक परिवार के तीन सदस्यों को मंगलवार को उनके पैतृक गांव मताना में एक साथ दफनाया गया। मृतकों – ओम प्रकाश सुथार, उनकी पत्नी सोरमा देवी और उनके पोते रोनित – को बिश्नोई परंपराओं के अनुसार अगल-बगल दफनाया गया।
सैकड़ों निवासी अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए, जिससे गांव में मातम छा गया। शव मंगलवार सुबह गांव पहुंचे, जिससे परिजनों में गहरा शोक का माहौल छा गया।
ओम प्रकाश के बेटे सुरेंद्र अपने माता-पिता और बेटे के शवों को देखकर बार-बार फूट-फूट कर रो पड़े। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने उन्हें सहारा दिया और अंतिम संस्कार में उनकी मदद की।
यह दुखद घटना 15 जून को उस समय घटी जब परिवार राजस्थान के मुकामधाम से लौट रहा था। उनकी कार की एक डंपर ट्रक से आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पुलिस को शवों को निकालने के लिए वाहन की खिड़कियां तोड़नी पड़ीं।
परिवार के छह सदस्य – ओम प्रकाश, सोरमा देवी, उनकी बेटी प्रमिला, पोता रोनित और पोतियां यशवी और खुशी – की मौके पर ही मौत हो गई। एक अन्य पोती तनवी, जो गंभीर रूप से घायल थी, ने सोमवार रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या सात हो गई।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, बच्चे गर्मी की छुट्टियों में अपने नाना-नानी के घर आए थे। ओम प्रकाश अपनी पत्नी, पोते रोनित, छोटी बेटी प्रमिला, प्रमिला की बेटी यशवी और अपनी बड़ी बेटी बाला की बेटियों खुशी और तन्वी को मुकाम धाम की तीर्थयात्रा पर ले गए थे। गर्भवती बाला घर पर ही रुकी थीं।
दुर्घटना से महज 15 दिन पहले ओम प्रकाश सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। मिनी सचिवालय के पास उनके सम्मान में 300 से अधिक लोगों की उपस्थिति में एक विदाई समारोह आयोजित किया गया था। वे जिला विकास एवं पंचायत विभाग में वरिष्ठ लेखाकार के पद पर कार्यरत थे और उन्होंने 1992 में चंडीगढ़ में क्लर्क के रूप में सरकारी सेवा में प्रवेश किया था।


Leave feedback about this