सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। बातचीत करते हुए संजय सरावगी ने कहा, “कांग्रेस और राजद, एसआईआर का विरोध इसलिए कर रही है, क्योंकि उनकी राजनीतिक जमीन खिसक रही है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना जरूरी है, लेकिन विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर सवाल उठाता रहता है। जिन जगहों पर एसआईआर में विपक्षी उम्मीदवार जीते, वहां के बारे में उनका क्या कहना है? वे शुरू से ही चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाते रहे हैं।”
जमुई में छेड़छाड़ की शिकार पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर मचे विवाद पर संजय सरावगी ने कहा, “जहां तक जमुई मामले की बात है, जैसे ही पुलिस को इसके बारे में पता चला, आठ घंटे के भीतर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। मुख्य आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया। ऐसे मामलों में, जब भी कोई अपराध होता है, पुलिस को कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई है। मुख्यमंत्री द्वारा तस्वीर पोस्ट करने के मामले में लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई और उसके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला भी दर्ज किया गया।”
जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा, “याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। इसलिए कोई भी प्रतिक्रिया देने से पहले न्यायपालिका की सर्वोच्च अदालत के निर्देशों का इंतजार करना उचित होगा।”
सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा, “चुनाव आयोग विश्वास पात्र संस्था है। चुनाव आयोग का जनता के ऊपर भरोसा बना रहना चाहिए। किसी के कह देने और किसी मान लेने से देश में अपराध तय नहीं होता, बल्कि यह जांच का विषय है। जांच के बाद बयान और आंदोलन करना चाहिए। देश और दुनिया में नकारात्मक संदेश नहीं जाना चाहिए।”

