N1Live National सवाई माधोपुर: पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक को रिश्वत मामले में 5 साल की सजा और 25,000 रुपये जुर्माना
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सवाई माधोपुर: पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक को रिश्वत मामले में 5 साल की सजा और 25,000 रुपये जुर्माना

Sawai Madhopur: Former Chief Office Superintendent sentenced to 5 years in jail and fined Rs 25,000 in bribery case.

7 अप्रैल । केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने पश्चिम मध्य रेलवे, सवाई माधोपुर (राजस्थान) के पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक जालंधर योगी को रिश्वत मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल की कठोर कारावास की सजा और 25,000 रुपये का जुर्माना सुनाया।

जांच के अनुसार, मामला 16 जून 2020 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि जालंधर योगी ने किए गए काम के लंबित अंतिम बिल को पास कराने के एवज में 11,500 रुपये की रिश्वत मांग की थी। इस दौरान सीबीआई ने एक जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की राशि आरोपी के कब्जे से बरामद कर ली गई।

जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 8 जनवरी 2021 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने सुनवाई के दौरान सभी सबूतों और गवाहों की गवाही को ध्यान में रखते हुए जालंधर योगी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, जो सार्वजनिक विश्वास को नुकसान पहुंचाने वाला अपराध है।

सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को पांच साल की सजा सुनाई और 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है तो आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

इस फैसले के बाद सीबीआई ने कहा कि यह कदम सतर्कता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश है। अधिकारी ने बताया कि भ्रष्टाचार की किसी भी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक पदों पर काम करने वाले लोग जिम्मेदारी और ईमानदारी से काम करें।

पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक जालंधर योगी के खिलाफ इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में रेलवे और अन्य विभागों में भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी और जनता का विश्वास बढ़ेगा।

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