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शशि थरूर ने परिसीमन बिल को बताया ‘राजनीतिक नोटबंदी’, बोले-जल्दबाजी न करे सरकार

Shashi Tharoor called the delimitation bill a "political demonetisation" and said the government should not rush into it.

17 अप्रैल । परिसीमन बिल को लेकर लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे ‘राजनीतिक नोटबंदी’ करार दिया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करना देश के संघीय ढांचे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

शशि थरूर ने मशहूर नारा ‘जस्ट डू इट’ को उलटते हुए कहा-‘डॉन्ट डू इट’। उन्होंने 2016 की नोटबंदी का जिक्र करते हुए इसे एक सबक बताया। शशि थरूर ने कहा, “आप परिसीमन को उसी जल्दबाजी में ला रहे हैं, जैसे नोटबंदी लाई गई थी। हमने देखा कि उससे कितना नुकसान हुआ। परिसीमन भी राजनीतिक नोटबंदी साबित हो सकता है, इसलिए इसे लागू मत कीजिए।”

उन्होंने आगे कहा कि परिसीमन में तीन बड़े मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है। पहला, छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना। दूसरा, उन राज्यों के साथ न्याय करना जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की नीति का पालन किया। शशि थरूर ने आरोप लगाया कि इस बिल से ऐसा लगता है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में असफलता पाई है, उन्हें ‘इनाम’ दिया जा रहा है, जबकि दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय हो रहा है।

वहीं, डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र में कुछ ही दिनों के भीतर इस बिल को पास कराने की कोशिश साजिश है। संविधान के तहत राज्यों को अपने अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें हर फैसले के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार राज्यों के अधिकारों को नजरअंदाज कर रही है और सब कुछ दिल्ली से नियंत्रित करना चाहती है। उनके मुताबिक, यह कदम संघीय ढांचे के खिलाफ है और राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करता है।

परिसीमन को आरक्षण से जोड़ने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के मुद्दों को लेकर न तो गंभीर है और न ही संवेदनशील, बल्कि वह 2011 की जनगणना के आंकड़ों को परिसीमन का आधार बनाकर खुद को ही फायदा पहुंचा रही है।

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