April 11, 2026
National

गोमती किनारे शिव का अद्भुत धाम, जहां के पानी में डूब जाता है बेलपत्र और लौट आता है फल

Shiva’s wonderful abode on the banks of the Gomti River, where the bael leaves sink in the water and the fruit returns.

गोमती नदी के किनारे पर बसा रुद्रावर्त कुण्ड एक ऐसा स्थान है, जो पहली नजर में बिल्कुल साधारण सा लगता है लेकिन इसके अंदर एक अद्भुत शक्ति छिपी हुई है। कहा जाता है कि इस कुंड के अंदर देवाधिदेव महादेव खुद शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।

कहते हैं कि रुद्रावर्त कुण्ड में जब कोई भक्त सच्चे मन से भगवान शिव का नाम लेकर बेलपत्र अर्पित करता है, तो वह बेलपत्र पानी में डूब जाता है। अब यह बात सुनने में जितनी साधारण लगती है, उतनी है नहीं। क्योंकि आमतौर पर बेलपत्र पानी में तैरता है, डूबता नहीं। लेकिन यहां, इस कुण्ड में जैसे ही बेलपत्र अर्पण किया जाता है, वह धीरे-धीरे नीचे चला जाता है। मानो सीधे शिवलिंग तक पहुंच रहा हो।

स्थानीय लोगों की मानें तो इस कुण्ड में भगवान शिव स्वयं शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इसलिए जो भी अर्पण किया जाता है, वह सीधे उन्हें प्राप्त होता है। एक और दिलचस्प बात यह भी है कि अगर बेलपत्र जरा सा भी टूटा या खंडित हो, तो वह नहीं डूबता।

सिर्फ बेलपत्र ही नहीं, यहां एक और अनोखी बात देखने को मिलती है। जब भक्त दूध चढ़ाते हैं, तो वह पानी में फैलने के बजाय एक सीधी धारा बनाकर नीचे की ओर जाता हुआ दिखाई देता है। आमतौर पर पानी में डाला गया दूध तुरंत फैल जाता है, लेकिन यहां यह दृश्य लोगों को हैरान कर देता है। ऐसा लगता है जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे एक दिशा दे रही हो।

मान्यता है कि अगर आप पांच फल अर्पित करते हैं, तो कुछ देर बाद उनमें से एक या दो फल वापस ऊपर आ जाते हैं। इन्हें प्रसाद के रूप में लिया जाता है। यह दृश्य देखने के बाद कई लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं आखिर यह कैसे होता है? कुछ लोग इसे आस्था का चमत्कार मानते हैं, तो कुछ इसके पीछे वैज्ञानिक कारण खोजने की कोशिश करते हैं।

नैमिषारण्य के पास स्थित यह पवित्र स्थल सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि एक अनोखा अनुभव भी देता है। यहां आने वाले लोग सिर्फ दर्शन ही नहीं करते, बल्कि इस रहस्य को अपनी आंखों से देखने की इच्छा भी लेकर आते हैं।

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