दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि 6 जनवरी को सदन में हुई एक “दुर्भाग्यपूर्ण घटना” के कारण तीन दिनों तक कार्यवाही बाधित रही और ऐसा माहौल बन गया जिसमें विधायी कामकाज जारी रखना असंभव हो गया।
पिछले साल गुरु तेग बहादुर की 350 वीं शहादत वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम पर चर्चा के बाद, 6 जनवरी को विधानसभा में आतिशी द्वारा सिख गुरुओं के प्रति कथित अनादर का मुद्दा एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है, जिसमें दिल्ली में सत्तारूढ़ भाजपा और पंजाब में आम आदमी पार्टी शामिल हैं।
आतिशी ने भाजपा पर नौवें सिख गुरु का नाम घसीटकर छोटी राजनीति करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस घटना के बाद उन्होंने दिल्ली विधानसभा की बैठकों में भाग नहीं लिया। जहां एक ओर पंजाब पुलिस ने आतिशी के कथित तौर पर “छेड़छाड़ किए गए” वीडियो क्लिप के इस्तेमाल और प्रसार को लेकर जालंधर में एफआईआर दर्ज की है, वहीं दिल्ली विधानसभा ने विशेषाधिकार के उल्लंघन को लेकर राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा है।
यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुप्ता ने कहा कि 7 जनवरी को सदन में 6 जनवरी की कार्यवाही का शब्दशः प्रतिलेख पढ़ा गया, जिसके बाद विपक्ष की नेता आतिशी को अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर दिया गया। उन्हें 6 जनवरी को भी यह मौका दिया गया था। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में पंजाब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, पुलिस, संबंधित अधिकारियों और इसमें शामिल राजनीतिक हस्तियों की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए और इस पूरे मामले की, जिसमें इसके पीछे कथित साजिश भी शामिल है, गहन जांच की जानी चाहिए।
गुप्ता ने कहा कि जब सदन में पहली बार यह मामला उठाया गया, तो आतिशी बिना जवाब दिए चली गईं, जबकि वह उस समय अपनी बात स्पष्ट कर सकती थीं। उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा में सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से इस मुद्दे को सुनने के बाद, स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जिससे अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
उन्होंने कहा, “हालांकि इस मामले को 7 जनवरी को दोबारा सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल निर्णय लेने से परहेज किया। किसी भी चर्चा की अनुमति देने से पहले तथ्यों की ठीक से पुष्टि करने के लिए एक दिन का समय लिया गया।” गुप्ता ने कहा कि अगले दिन, विधानसभा सचिवालय ने वीडियो साक्ष्य के माध्यम से रिकॉर्ड की हूबहू पुष्टि की और पुष्टि के बाद, आतिशी को फिर से सदन में आकर स्पष्टीकरण देने या खेद व्यक्त करने और अपना बचाव दर्ज कराने के लिए कहा गया।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह के विवाद तब उत्पन्न होते हैं जब भावनात्मक जुड़ाव, आदर और समर्पण की कमी होती है, जिससे ऐसे शब्दों का उच्चारण होता है जो भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। गुप्ता ने कहा कि सदन में कोई भी चर्चा विपक्ष के नेता के विचार व्यक्त किए बिना कभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन के नेता और विपक्ष के नेता महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने कहा कि चर्चा में भाग न लेना, कार्यवाही के दौरान उचित सम्मान न देना, सदन छोड़कर चले जाना और बार-बार बुलाए जाने के बावजूद सत्र के शेष समय तक अनुपस्थित रहना गंभीर चिंता का विषय है। दिल्ली विधानसभा ने गुरुवार को आतिशी को हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में सिख गुरुओं के खिलाफ कथित तौर पर की गई “अपमानजनक टिप्पणी” के संबंध में 19 जनवरी तक अपना लिखित बयान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।


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