September 30, 2026
National

वीरमणि पॉक्सो मामले में एसआईटी की बड़ी तैयारी, 10 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल होने की उम्मीद

जेम ग्रेनाइट्स के 84 वर्षीय संस्थापक आर. वीरमणि के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) 10 दिनों के भीतर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में अपनी चार्जशीट दाखिल कर सकती है। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी।

जांच करने वाले अधिकारी अक्टूबर 2025 में दर्ज पहले मामले की जांच पूरी करने के करीब हैं। यह चार्जशीट 29 अगस्त को वीरमणि की गिरफ्तारी के लगभग एक महीने बाद दाखिल की जा सकती है। गिरफ्तारी तब हुई थी जब कोर्ट ने पुलिस को जांच जारी रखने का आदेश दिया था।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टीम को उम्मीद है कि वे एक सप्ताह या 10 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल कर देंगे और वे इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। इस बीच, एसआईटी उन नई शिकायतों की जांच कर रही है जिनमें वीरमणि पर नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने कहा कि सोमवार को दर्ज एक और पॉक्सो मामले में अलग से चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यह मामला एक नाबालिग लड़की की मां की शिकायत पर दर्ज किया गया था।

अधिकारी ने कहा कि जांच करने वाले उस मामले की जांच में भी तेजी ला रहे हैं। मूल मामले में प्रस्तावित चार्जशीट और नई शिकायत की जांच अलग-अलग चल रही है। पहला मामला 7 अक्टूबर 2025 को दर्ज किया गया था। एक एनजीओ वॉलंटियर ग्रेटर चेन्नई पुलिस के एंटी-वाइस स्क्वाड के पास एक पेन ड्राइव लेकर पहुंचा था, जिसमें एक वीडियो था। इस वीडियो में वीरमणि को कथित तौर पर एक नाबालिग का यौन शोषण करते हुए दिखाया गया था।

इसके बाद फरवरी में पुलिस ने वीडियो में दिख रही लड़की की पहचान करने में मुश्किलों का हवाला देते हुए मामले को बंद करने की कोशिश की थी। हालांकि, स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और आगे जांच का आदेश दिया, जिससे कार्यवाही जारी रही।

29 अगस्त को सेंट्रल क्राइम ब्रांच के एंटी-वाइस स्क्वाड ने वीरमणि, 60 वर्षीय एम. शांति और उनके 63 वर्षीय पति महेंद्र सिम्हन को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी मामला दर्ज होने के लगभग 11 महीने बाद हुई थी। तीनों पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ की धाराओं 7, 8, 15(1) और 21(1) के साथ-साथ ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम’ (आई एक्ट) की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस ने ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम’ की धाराओं को भी लागू किया, क्योंकि जांच में यह पता चला था कि पीड़ितों में से एक अनुसूचित जाति से थी। इसके बाद वीरमणि के पूर्व कर्मचारी 45 वर्षीय गणेशन को गिरफ्तार किया गया। उस पर कथित तौर पर वीडियो रखने और इसकी सूचना न देने का आरोप था।

सभी चार आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल ने 24 सितंबर को मूल मामले और उससे जुड़े मामलों, जिनमें जांचकर्ताओं तक पहुंची अतिरिक्त शिकायतें भी शामिल हैं, की जांच के लिए पूरी तरह से महिलाओं के प्रतिनिधित्व वाली एसआईटी का गठन किया।

Leave feedback about this

  • Service