October 14, 2026
National

देश में स्थिति गंभीर, लोकतंत्र को बचाने की जरूरत : अशोक गहलोत

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को बीकानेर में केंद्रीय मंत्रियों के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर निशाना साधा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर अशोक गहलोत ने कहा, “उनके बयानों का क्या मतलब है? हम अमित शाह के बयान को गंभीरता से क्यों लें? जहां तक मोदी सरकार की बात है, इस बार, अगली बार, वे निश्चित रूप से सत्ता से बाहर जाने वाले हैं। इसे तय मान लीजिए, इसे गारंटी समझिए।”

अशोक गहलोत ने कहा, “अमित शाह और क्या कह सकते हैं? देश में स्थिति बेहद गंभीर है। लोकतंत्र को बचाने की जरूरत है। पूरा देश गुस्से से भरा है। भारत के चुनाव आयोग का रवैया, एसआईआर करना, वोट हटाना, बंगाल में 29 लाख वोट हटाए गए। चुनाव हुए और सुप्रीम कोर्ट से भी टिप्पणियां आईं, ‘अगर इस बार नहीं, तो अगली बार वोट देंगे’। इस तरह की टिप्पणियां, देश के लोग कभी नहीं भूल पाएंगे। यह इतनी कठोर, कड़वी और विचारहीन टिप्पणी थी।”

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस पार्टी को 2029 के लोकसभा चुनावों में लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ेगा, साथ ही उन्होंने मतदाता सूची के एसआईआर पर विपक्ष के विरोध की आलोचना की थी।

वहीं, गजेंद्र सिंह शेखावत के बयान पर अशोक गहलोत ने कहा, “वे कहते हैं, ‘मैंने चिट्ठी लिखी है’। ऐसा लगता है जैसे लंबे समय से सूखे के हालात हैं और अब वे कह रहे हैं कि उन्होंने चिट्ठी लिखी है। मैं उनके यहां दिए गए बयान की निंदा करता हूं। यह कहना कि सूखा पहले से ही था और अब उन्होंने चिट्ठी लिखी है, एक केंद्रीय मंत्री के लिए यह कहना कि चिट्ठी लिखना ही काफी है, इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है मामले से पल्ला झाड़ लेना।”

अशोक गहलोत ने कहा कि इसके बजाय उन्हें उन इलाकों का दौरा करना चाहिए जहां सूखे की स्थिति बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से, जब मैं सांसद था, यहां जोधपुर में उनकी जगह पर 20 साल तक दौरा किया है।”

बता दें कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने टिप्पणी की थी कि राजस्थान में गंभीर सूखे की स्थिति के बारे में चिट्ठी लिखना ही काफी है, जिसकी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कड़ी निंदा की। गहलोत ने शेखावत की आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से चले आ रहे सूखे के हालात पर केवल चिट्ठी लिखना “मामले से पल्ला झाड़ने” जैसा है, बजाय इसके कि गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया जाए।

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