N1Live Entertainment छात्रों के समर्थन में उतरीं सौंदर्या रजनीकांत, कहा- ‘उनकी आवाज सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए’
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छात्रों के समर्थन में उतरीं सौंदर्या रजनीकांत, कहा- ‘उनकी आवाज सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए’

Soundarya Rajinikanth comes out in support of students, says, "Their voices should be heard with respect."

फिल्म निर्माता और सुपरस्टार रजनीकांत की छोटी बेटी सौंदर्या रजनीकांत इन दिनों छात्रों के समर्थन में दिए गए अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। सौंदर्या ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी बातों को सुना जाना चाहिए।

सौंदर्या रजनीकांत ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम के जरिए छात्रों के समर्थन में एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ”मैं भारत के छात्रों के साथ एकजुटता से खड़ी हूं। छात्रों की आवाज को सम्मान, गरिमा और संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए, क्योंकि यही युवा देश का भविष्य हैं।”

उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, ”हर छात्र को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, जो उसके अंदर आत्मविश्वास पैदा करे और उसे आगे बढ़ने की उम्मीद दे। एक बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है, ताकि छात्रों को निष्पक्ष और भरोसेमंद माहौल मिल सके।”

सौंदर्या के अलावा मलयालम फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री मंजू वारियर ने भी छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर राजनीति से पहले इंसानियत को महत्व दिया जाना चाहिए। युवाओं को सवाल पूछने, अपनी परेशानियां सामने रखने और सरकार से जवाब मांगने का अधिकार है।

मंजू वारियर ने कहा, ”देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का भरोसा बनाए रखना बहुत जरूरी है। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास तभी मजबूत हो सकता है, जब उसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता हो। छात्रों को डर का माहौल नहीं बल्कि उम्मीद और बेहतर भविष्य मिलना चाहिए।”

दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्य परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी समस्याओं, जिसमें नीट-यूजी पेपर लीक जैसे मामले भी शामिल हैं, को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।

उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

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