अभिनेता दीपक पाराशर ने हाल ही में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सीआईएनटीएए) की कार्यकारी समिति के निर्वाचित सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया है। अभिनेता ने हाल में आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पिछले डेढ़ साल से ऐसा लग रहा है कि सिर्फ दो लोग ही काम कर रहे हैं जबकि बाकी मेंबर्स शामिल नहीं हैं।
उन्होंने बताया, “कोई भी ऑर्गनाइजेशन टीम की तरह काम करता है। मैंने देखा है कि सीआईएनटीएए है और हमारे पास ट्रस्ट भी है। ट्रस्ट चैरिटी कमिशनर के अधीन आता है जबकि सीआईएनटीएए लेबर कमिशनर के अधीन लेकिन सीआईएनटीएए के अंदर सिर्फ एक या दो लोगों को ही आगे दिखाया जा रहा है। ऐसा बताया जा रहा है जैसे 2024 से अब तक जो कुछ भी हुआ है वो सिर्फ उन्हीं की वजह से हुआ है। हालांकि, ये सच नहीं है, हमारे जनरल सेक्रेटरी भी इसमें शामिल रहे हैं। मैं ट्रेसर हूं और हम दोनों साथ में बैठक में गए हैं। हमने चर्चाओं में हिस्सा लिया, अपनी राय दी और कमिश्नर की बातें भी सुनीं। हम हर मीटिंग, हर इवेंट और हर फंक्शन में गए हैं। लेकिन अचानक से जनरल सेक्रेटरी या ट्रेसर का नाम ही नहीं लिया गया।”
उन्होंने आगे कहा, “ये सही नहीं है। इससे ये गलत मैसेज जाता है कि सिर्फ दो ही लोग काम कर रहे हैं और बाकी कोई योगदान नहीं दे रहा। जनरल सेकेट्री ने भी बहुत काम किया है। जहां तक मेरा सवाल है, मेरी अटेंडेंस सबसे ज्यादा रही है। मेरी अटेंडेंस 39 थी जबकि प्रेसिडेंट, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, जनरल सेकेटरी और ईसी मेंबर्स की अटेंडेंस 29 से ऊपर नहीं थी और ट्रेसर होने के नाते मैंने सीआईएनटीएए के हर सदस्य के एक-एक रुपये को बचाने की भी कोशिश की है।”
आईएएनएस ने सवाल किया, “क्या आप कोई ऐसा खास फैसला या घटना बता सकते हैं, जिसमें आपको लगा हो कि एग्जीक्यूटिव कमेटी को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया हो?”
अभिनेता दीपक पाराशर ने कहा, “सबसे पहले, मैं यह कहना चाहूंगा कि लेबर कमिश्नर ने अब एक लेटर भेजा है जिसमें कहा गया है कि पचास परसेंट से ज्यादा मेंबर्स ने इस्तीफा दे दिया है। हमारे संविधान के अनुसार, ऐसा होने पर कमेटी भंग हो जाती है। इसके बावजूद, एजीएम हो रही है और बैठकें हो रही हैं। जनरल सेक्रेटरी उपासना सिंह, जो दो साल से ऑफिस में थीं, अब उस पद पर नहीं हैं। अब जब कमेटी भंग हो गई है, तो मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं सीआईएनटीएए का जनरल सेक्रेटरी हूं।”
उन्होंने पद्मिनी कोल्हापुरी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब वे जनरल सेक्रेटरी के तौर पर अपना नाम नहीं लिख रही हैं। उन्होंने कहा, “पद्मिनी जी को अब जनरल सेक्रेटरी बुलाया भी जा रहा है। मेरा सवाल ये है कि क्या कोई चुनाव हुआ था? या ये फैसला कैसे लिया गया? गया? कुछ दिन पहले हेमंत पांडे की जगह ये कहा गया कि उनकी जगह मिस्टर पिंटल काम करते रहेंगे। मैंने पूछा कि क्या हेमंत पांडे से इस बारे में पूछा गया था? वो सीनियर ज्वाइंट सेक्रेट्री हैं। वो कई बैठक में जाते हैं और उन्होंने एक्टर्स के लिए बहुत काम किया है। आप उन्हें ऐसे कैसे हटा सकते हैं? मैंने कहा कि पहले उनसे पूछना चाहिए था कि क्या वो इस पद पर बने रहना चाहते हैं या नहीं। अगर वो कहते कि नहीं चाहते, तब आप बदलाव कर सकते थे। उन्हें एक ईमेल भेजा गया था। जब मुझे वो ईमेल मिली तो मैं हैरान रह गया कि हेमंत पांडे की जगह मिस्टर पिंटल को नियुक्त किया जा रहा है।”

