हरियाणा जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड की 59वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को पंचकुला, रोहतक, चरखी दादरी और हांसी में जल आपूर्ति की स्थिति में सुधार के लिए एक विशेष रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने पिंजोर, मोरनी और कालका क्षेत्रों के लिए एक जल संयंत्र के निर्माण का भी आदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मानसून के मौसम में कौशल्या बांध में अधिकतम वर्षा जल का भंडारण किया जाना चाहिए और अधिकारियों को इसकी भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष उपाय करने का निर्देश दिया।
बैठक के दौरान, राज्य भर में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज और स्वच्छता बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से 2026-27 के लिए कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष के दौरान 1,330 विकास कार्य पूरे किए गए, जिनमें से 1,000 ग्रामीण क्षेत्रों में और 330 शहरी क्षेत्रों में थे। इनमें 82 नहर आधारित जल परियोजनाओं, 254 ट्यूबवेल, 91 बूस्टिंग स्टेशनों और 4,300 किलोमीटर से अधिक जल आपूर्ति पाइपलाइनों का निर्माण शामिल है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न शहरों में 150 किलोमीटर सीवरेज लाइनें बिछाई गईं।
आयुक्त एवं सचिव पंकज यादव ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए हरियाणा भर में पेयजल आपूर्ति और सीवरेज सुविधाओं में सुधार हेतु एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। कार्ययोजना के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी पेयजल आपूर्ति के लिए 712 नई संवर्धन एवं सुधार योजनाओं को 2,534.39 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि यमुना की तरह ही घग्गर नदी में भी अनुपचारित या प्रदूषित जल न छोड़ा जाए। उन्होंने अधिकारियों को इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक अलग प्रस्ताव तैयार करने को कहा।
उन्होंने ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने और परिचालन लागत को कम करने के लिए जल संयंत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना का भी निर्देश दिया।

