1989 में रानीगंज कोयला खदान बचाव अभियान के नायक, दिवंगत इंजीनियर जसवंत सिंह गिल की एक प्रतिमा का अनावरण रानीगंज कोयला क्षेत्र (पश्चिम बंगाल) के निकट सीतारामपुर स्थित माइन रेस्क्यू स्टेशन (एमआरएस) में किया गया। यह प्रतिमा महाबीर कोलियरी खदान बचाव अभियान की 36वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में स्थापित की गई थी, जब खदान में तैनात खनन इंजीनियर गिल ने एक कैप्सूल डिज़ाइन किया था ताकि फंसे हुए 65 खनिकों को समय पर बचाया जा सके। यह देश में अपनी तरह का एक अनूठा बचाव अभियान था जिसके लिए गिल को कई पुरस्कार और प्रशंसाएँ मिलीं, जिनमें ‘कैप्सूल गिल’ की उपाधि भी शामिल है।
अमृतसर के इस इंजीनियर का 2019 में निधन हो गया। खनन और बचाव कार्यों में लगभग चार दशकों का अनुभव रखने वाले गिल ने कोयला खनन के इतिहास में पहली बार स्टील कैप्सूल तकनीक अपनाई और पिछले साल उन्हें मरणोपरांत ‘बांग्ला गौरव सम्मान-2024’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने 1961 से 1965 के बीच धनबाद (झारखंड) स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान/भारतीय खान विद्यालय (IIT-ISM) से खनन अभियांत्रिकी की पढ़ाई की थी। उन्हें “सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक” से भी सम्मानित किया गया था।
उनके शांत, दृढ़ अभिनय की कहानी अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म मिशन रानीगंज के माध्यम से दुनिया को बताई गई। उनके पुत्र डॉ. सरप्रीत सिंह ने कहा कि उनके पिता की स्मृति और जीवन अन्य पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
अमृतसर में मजीठा रोड पर एक गोलचक्कर का नाम उनके नाम पर रखा गया है, ताकि नागरिकों को उनकी विरासत के बारे में जानने का मौका मिल सके।

