March 19, 2026
National

आचार संहिता की सख्ती से वेल्लोर का 100 साल पुराना पोइगई पशु बाजार प्रभावित, कारोबार में भारी गिरावट

Strict code of conduct impacts 100-year-old Poigai cattle market in Vellore, leading to a sharp drop in business

19 मार्च । तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के पास स्थित पोइगई का एक सदी पुराना साप्ताहिक पशु बाजार इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले लागू हुई आचार संहिता की सख्ती ने इस पारंपरिक बाजार की रफ्तार को काफी धीमा कर दिया है।

चेन्नई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे के किनारे, पोइगई बस स्टैंड के पास स्थित यह बाजार वेल्लोर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। हर मंगलवार यहां हजारों व्यापारी जुटते थे और बड़ी संख्या में पशुओं की खरीद-फरोख्त होती थी। आम तौर पर एक दिन में 2,000 से ज्यादा व्यापारी आते थे और करीब 1,500 पशुओं की बिक्री होती थी, जिससे करोड़ों रुपए का कारोबार होता था।

हालांकि, आचार संहिता लागू होने के बाद नकदी ले जाने की सीमा 50,000 रुपए तय कर दी गई है, जिससे इस बाजार पर सीधा असर पड़ा है। हाल ही में हुए पहले बाजार दिन में ही इसका असर साफ दिखा और व्यापारियों की संख्या कम रही और पशुओं की आवक भी घट गई।

यह बाजार मुख्य रूप से नकद लेनदेन पर आधारित है, इसलिए कड़ी निगरानी और जांच ने व्यापार को और मुश्किल बना दिया है। फ्लाइंग स्क्वॉड और निगरानी टीमें लगातार जांच कर रही हैं और बिना हिसाब-किताब के नकद पर कार्रवाई भी हो रही है। इससे व्यापारियों और खरीदारों में डर का माहौल है।

व्यापारियों के मुताबिक, सामान्य दिनों की तुलना में कारोबार में करीब 30 फीसदी तक गिरावट आई है। साथ ही, कई लोग डिजिटल भुगतान के आदी नहीं हैं, जिससे वे नए विकल्पों को अपनाने में परेशानी महसूस कर रहे हैं।

यह बाजार सिर्फ वेल्लोर तक सीमित नहीं है, बल्कि तिरुपत्तूर, रानीपेट, धर्मपुरी और कृष्णागिरी जैसे आसपास के जिलों के अलावा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से भी व्यापारी यहां आते थे। अब अंतर-जिला और अंतरराज्यीय सीमाओं पर कड़ी जांच के कारण बाहरी व्यापारियों की संख्या भी कम हो गई है।

इस स्थिति ने पशु व्यापार से जुड़े लोगों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह बाजार उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। आने वाले हफ्तों में भी चुनावी प्रतिबंध जारी रहने की संभावना है, जिससे व्यापार पर असर बना रह सकता है।

ऐसे में व्यापारी और संबंधित लोग मांग कर रहे हैं कि चुनावी नियमों का पालन करते हुए वैध व्यापार को सुचारु रूप से चलाने के लिए कुछ राहत उपाय किए जाएं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर न पड़े।

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