सोमवार को सोलन जिले के नौनी स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में आयोजित “स्थिरता के लिए तालमेल: पादप स्वास्थ्य प्रबंधन में शिक्षाविदों और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के चौधरी सरवन कुमार (सीएसके) ने अपनी छाप छोड़ी।
विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व उसके पादप रोगविज्ञान विभाग ने किया, जिसने राष्ट्रीय मंच पर अपनी अकादमिक उत्कृष्टता और अनुसंधान नेतृत्व का प्रदर्शन किया। ये उपलब्धियां विश्वविद्यालय की सशक्त अनुसंधान संस्कृति, अकादमिक उत्कृष्टता और पादप स्वास्थ्य विज्ञान में नेतृत्व को दर्शाती हैं। कुलपति अशोक कुमार पांडा ने विश्वविद्यालय के सभी सदस्यों के साथ मिलकर सभी पुरस्कार विजेताओं को संस्थान को गौरव और सम्मान दिलाने के लिए बधाई दी।
पादप रोगविज्ञान विभाग के प्रमुख डी.के. बन्याल के नेतृत्व में एक टीम ने संकाय सदस्यों प्रदीप कुमार, शिखा शर्मा और शबनम कटोच तथा 23 स्नातकोत्तर छात्रों के साथ वैज्ञानिक विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस संगोष्ठी में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और युवा विद्वानों को अकादमिक-उद्योग सहयोग के माध्यम से पादप स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए नवीन और टिकाऊ दृष्टिकोणों पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाया गया। विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण तब आया जब हिमालयन साइकोपैथोलॉजिकल सोसाइटी ने सहायक प्रोफेसर शिखा शर्मा को प्रतिष्ठित युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया। पादप रोगविज्ञान में उनके असाधारण योगदान और पादप स्वास्थ्य प्रबंधन में अनुसंधान को आगे बढ़ाने की उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान दिलाया।


Leave feedback about this