नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली समेत पांच राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज मामलों को निरस्त किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों से किया गया अपना वादा पूरा कर रही है और भाजपा शासित राज्यों में भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे।
नड्डा ने कहा, “25 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और मैंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी। इसी क्रम में भाजपा शासित राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की गई और अब हम उस आश्वासन को पूरा कर रहे हैं।”
उन्होंने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि युवाओं की प्रगति और विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली पुलिस को फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के जरिए चिन्हित 2,873 आपराधिक इतिहास वाले लोगों के खिलाफ अलग से नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी दी है।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार और अदालत के आदेश को देखते हुए पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है।
सौरव दास ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के आधार पर दावा किया था कि प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे लोग वास्तव में वहां मौजूद थे, तो उनके खिलाफ अलग से जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, न कि प्रदर्शनकारी छात्रों को निशाना बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे लोगों की जांच के लिए अलग एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने के सरकार के आश्वासन को भी अपने आदेश का हिस्सा बनाया है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिया कि मुआवजे की राशि 90 दिनों के भीतर सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
सीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए पार्टी 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस ले रही है। सौरव दास ने इस फैसले के लिए अदालत, दोनों पक्षों के वकीलों और सॉलिसिटर जनरल का आभार भी जताया। सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया।


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