June 29, 2026
National

125 दिन की ग्रामीण रोजगार योजना पर रुख स्पष्ट करे तमिलनाडु सरकार: पीएमके

Tamil Nadu government should clarify its stance on the 125-day rural employment scheme: PMK

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने रविवार को तमिलनाडु सरकार से केंद्र की नई 125-दिवसीय ग्रामीण रोजगार योजना पर अपना रुख तत्काल स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी के कारण राज्य के लाखों ग्रामीण मजदूरों के सामने आजीविका को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

जारी बयान में अंबुमणि रामदास ने कहा कि योजना एक जुलाई से लागू होने जा रही है, लेकिन इसके लागू होने में अब केवल दो दिन शेष रहने के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इसे लागू करेगी या नहीं। उन्होंने बताया कि 19 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले ही इस योजना को लागू करने की अधिसूचना जारी कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में बदलाव करते हुए रोजगार की वार्षिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी है। नई योजना के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में 95,692 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें तमिलनाडु के लिए 7,957.57 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

पीएमके अध्यक्ष ने बताया कि आंध्र प्रदेश, केरल और पुडुचेरी ने इस योजना को लागू करने की घोषणा कर दी है, जबकि तेलंगाना और कर्नाटक इसके प्रावधानों का अध्ययन कर रहे हैं और कुछ शर्तों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती देने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि यदि कानूनी चुनौती आगे बढ़ती है तो ग्रामीण श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार अपने संसाधनों से अलग रोजगार योजना शुरू करेगी।

अंबुमणि रामदास ने कहा कि तमिलनाडु को भी यह अधिकार है कि वह इस योजना को लागू करे या इसका विरोध करे, क्योंकि संशोधित व्यवस्था में राज्य सरकार की वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि केंद्र को यह तय करने का अधिक अधिकार दिया गया है कि योजना के तहत कौन-कौन से कार्य किए जा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का आरोप है कि इन बदलावों से राज्य सरकारों के अधिकार और स्वायत्तता कमजोर होती है। रामदास के अनुसार, यदि तमिलनाडु इस नई योजना को अपनाता है तो राज्य सरकार को लगभग 5,305.04 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा। इसके बाद कुल उपलब्ध राशि 13,262.61 करोड़ रुपये हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 479.49 रुपये की मजदूरी दर के आधार पर यह राशि लगभग 27.68 करोड़ मानव-दिवस (पर्सन-डे) का रोजगार उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, राज्य में लगभग 69.76 लाख ग्रामीण परिवार रोजगार की मांग कर रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक परिवार को औसतन केवल 40 दिन का ही रोजगार मिल पाएगा, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है।

पीएमके अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि तमिलनाडु इस योजना को लागू नहीं करता है तो मौजूदा मनरेगा आवंटन में बची केवल 440.90 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध रहेगी, जिससे प्रत्येक लाभार्थी को औसतन सिर्फ 1.3 दिन का रोजगार ही मिल सकेगा। इसके बाद राज्य सरकार को ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम पूरी तरह अपने संसाधनों से चलाना होगा।

उन्होंने राज्य सरकार से बिना किसी और देरी के अपना फैसला घोषित करने की अपील की।

अंबुमणि रामदास ने कहा कि यदि तमिलनाडु केंद्र की इस योजना को लागू नहीं करने का निर्णय लेता है तो उसे तत्काल एक वैकल्पिक ग्रामीण रोजगार योजना की घोषणा करनी चाहिए, जिससे चुनावी वादे के अनुसार ग्रामीण परिवारों को प्रतिवर्ष 150 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

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