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तमिलनाडु में तीन टोल प्लाजा पर ‘बैरियर-फ्री’ टोल सिस्टम लागू करने की तैयारी

Tamil Nadu to implement 'barrier-free' toll system at three toll plazas

31 मार्च । राजमार्ग (हाईवे) आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के तहत तमिलनाडु के तीन प्रमुख टोल प्लाजा पर बाधा (बैरियर-फ्री) के टोल वसूलने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

नई मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) प्रणाली एनएच-48 पर नेमिली और चेन्नासमुद्रम टोल प्लाजा और एनएच-45 पर परानूर टोल प्लाजा पर लागू की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य लंबी कतारों को समाप्त करना, निर्बाध यातायात सुनिश्चित करना और राज्य भर में वाहन चालकों के लिए यात्रा समय को कम करना है।

पारंपरिक टोल प्लाजा के विपरीत, जहां वाहनों को भुगतान के लिए धीमा होना या रुकना पड़ता है। एमएलएफएफ प्रणाली वाहनों को बिना किसी बाधा के सामान्य राजमार्ग गति से चलने की अनुमति देती है। यह प्रणाली फास्टैग खातों से जुड़ी रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरों के संयोजन का उपयोग करती है।

जैसे ही वाहन टोल क्षेत्र से गुजरते हैं, आरएफआईडी रीडर फास्टैग विवरण का पता लगाते हैं जबकि एएनपीआर कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को कैप्चर करते हैं। इसके बाद सिस्टम वास्तविक समय में डेटा को सत्यापित करता है और स्वचालित रूप से जुड़े खाते से टोल राशि काट लेता है, जिससे एक सुगम और संपर्क रहित टोल भुगतान का अनुभव सुनिश्चित होता है।

एनएचआई अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु में तैयारी पहले से ही चल रही है और एएनपीआर कैमरों और सहायक बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। भौतिक स्थापना का कार्य चार महीनों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद पूर्ण कार्यान्वयन से पहले सॉफ़्टवेयर एकीकरण और परीक्षण किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि दोहरी परत वाली यह तकनीक सटीकता बढ़ाने और राजस्व रिसाव को रोकने के लिए डिजाइन की गई है। फास्टैग पहचान विफल होने की स्थिति में एएनपीआर कैमरे वाहनों की पहचान करने और टोल भुगतान संसाधित करने के लिए बैकअप सिस्टम के रूप में कार्य करेंगे।

प्रवेश-नियंत्रित राजमार्गों पर यह प्रणाली प्रवेश और निकास डेटा का उपयोग करके तय की गई सटीक दूरी के आधार पर टोल की गणना करने में भी सक्षम होगी।

एमएलएफएफ की शुरुआत से टोल प्लाजा पर वाहनों के खड़े रहने की समस्या को समाप्त करके ईंधन की खपत और वाहन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इससे टोल प्लाजा के रखरखाव से जुड़ी लागतों को कम करने में भी मदद मिलेगी।

तमिलनाडु इस उन्नत टोल प्रणाली को अपनाने वाले पहले राज्यों में से एक है, जो इसे स्मार्ट, तेज और अधिक कुशल राजमार्ग यात्रा की दिशा में भारत के परिवर्तन में अग्रणी स्थान पर रखता है।

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