N1Live Haryana केंद्र की परिवर्तन योजना का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर में एक वर्ष के भीतर 2 लाख प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को बदलना है।
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केंद्र की परिवर्तन योजना का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर में एक वर्ष के भीतर 2 लाख प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को बदलना है।

The Centre's transformation plan aims to replace 200,000 polluting trucks and buses in Delhi-NCR within a year.

केंद्र सरकार ने अपनी परिवर्तन योजना के तहत सभी लाभार्थियों का पंजीकरण एक वर्ष के भीतर पूरा करने की योजना बनाई है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर में भारत स्टेज (बीएस)-IV या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों के अनुरूप दो लाख से अधिक ट्रकों और बसों को बीएस-VI या उससे भी सख्त मानकों के अनुरूप वाहनों या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना है।

परिवहन वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन को कम करने के लिए वाहन परिसंपत्तियों के त्वरित नवीनीकरण और प्रोत्साहन कार्यक्रम (PARIVARTAN) के तहत, पात्र वाहनों को BS-VI या इससे भी सख्त मानकों का पालन करने वाले वाहनों या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जाएगा।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के सचिव वी उमाशंकर ने कहा कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में पंजीकृत वाहन प्रतिस्थापन के लिए पात्र हैं। मीडिया को संबोधित करते हुए उमाशंकर ने कहा कि योजना शुरू होने के एक महीने के भीतर ही 1,300 से अधिक ट्रक और बस मालिकों ने इसके तहत पंजीकरण करा लिया है।

यह योजना एनसीआर के 37 जिलों को कवर करती है—दिल्ली में 13, हरियाणा में 14, उत्तर प्रदेश में आठ और राजस्थान में दो। इससे लगभग 1.9 लाख ट्रकों और 16,329 बसों को लाभ मिलने की उम्मीद है।सचिव ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में कुल वाहन बेड़े में ट्रकों और बसों की हिस्सेदारी केवल लगभग 3 प्रतिशत है, लेकिन ये क्षेत्र के पीएम2.5 उत्सर्जन में लगभग 36 प्रतिशत का योगदान करते हैं।

परिवर्तन योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 9,585 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 5,041 करोड़ रुपये का बजटीय समर्थन शामिल है। इसका वित्तपोषण आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) द्वारा किया जाता है और इसका कार्यान्वयन MoRTH द्वारा किया जाता है।

इस योजना के तहत वाहन मालिकों को पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने और उनकी जगह कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कई वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं। इनमें पात्र वाहन ऋणों पर पांच वर्षों के लिए पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, 10 वर्षों के लिए 100 प्रतिशत रोड टैक्स छूट, एक्स-शोरूम मूल्य पर कम से कम 8 प्रतिशत की मूल उपकरण निर्माता (OEM) छूट और पंजीकरण शुल्क में छूट शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, बीएस-वीआई डीजल या सीएनजी वाहनों के खरीदारों को वाहन की श्रेणी के आधार पर पांच साल तक 1,200 रुपये से लेकर 4,800 रुपये तक के मासिक ईंधन वाउचर प्राप्त होंगे। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को इसके बदले 64,000 रुपये से लेकर 2.56 लाख रुपये तक का एकमुश्त प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून में परिवर्तन योजना को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य दिल्ली और हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में पंजीकृत दो लाख से अधिक बीएस-IV और उससे पुराने ट्रकों और बसों के प्रतिस्थापन में तेजी लाना है।

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