कांग्रेस ने बुधवार को पीएम केयर फंड के उपयोग पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जहां लगभग 1,280 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए थे, वहीं केवल 87.85 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि मार्च 2025 तक फंड का कोष बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये हो गया था।
कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने कोविड-19 महामारी के दौरान बनाए गए कोष में इतनी बड़ी राशि को बनाए रखने के उद्देश्य पर सवाल उठाया। “क्या प्रधानमंत्री को परवाह है या प्रधानमंत्री को परवाह नहीं है?” सुरजेवाला ने दान में मिली राशि और खर्च की गई राशि के बीच के अंतर की ओर इशारा करते हुए कहा।
उन्होंने कहा, “जनता ने अपनी मेहनत की कमाई से खुले दिल से उदारतापूर्वक दान दिया, लेकिन डेढ़ साल की रहस्यमय देरी के बाद सामने आई लेखापरीक्षा रिपोर्ट ने इस कोष की सच्चाई को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा कि कुल प्राप्तियों में से केवल लगभग 0.06 प्रतिशत का ही उपयोग किया गया था।
उन्होंने पूछा, “अगर महामारी और आपातकाल के दौरान भी जनता का पैसा बच्चों, बीमारों और असहायों के लिए नहीं था, तो यह खजाना किसके लिए जमा किया जा रहा है?” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किए गए पीएम केयर्स फंड का नवीनतम ऑडिट विवरण के अनुसार, 31 मार्च, 2025 को समापन शेष 8,452 करोड़ रुपये था।
कुल धनराशि में से 7,846.65 करोड़ रुपये, यानी लगभग 93 प्रतिशत, सावधि जमा में रखे गए थे। शेष राशि अनुसूचित बैंकों में नकद के रूप में रखी गई थी। बयान में यह भी बताया गया कि 2024-25 के दौरान फंड द्वारा अर्जित ब्याज लगभग उस वर्ष प्राप्त दान के बराबर था।
यह खुलासा 31 मार्च, 2025 को वित्तीय वर्ष की समाप्ति के एक वर्ष से अधिक समय बाद हुआ। इस विवरण का ऑडिट किया गया और अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में ही इस पर हस्ताक्षर किए गए। सुरजेवाला ने ऑडिट के विवरण को सार्वजनिक करने में हुई देरी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, “इस ऑडिट को डेढ़ साल तक क्यों छिपाकर रखा गया? जब जवाबदेही के सवाल उठते हैं, तो ‘व्यवस्था’ चुप क्यों हो जाती है?” उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोष जनसेवा के बजाय “आपदा में अवसर” का उदाहरण बन गया है। कांग्रेस ने यह सवाल भी उठाया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान गठित इस कोष की लगभग 93 प्रतिशत राशि को सावधि जमा में क्यों रखा गया है।

