सरकार ने पंचायतों को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर जल सेवा मूल्यांकन के तहत पेयजल व्यवस्था से संबंधित कार्यों को अद्यतन करने के लिए कहा है, ताकि गांवों को तीसरे पक्ष के सर्वेक्षणों पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक रूप से अपनी जल वितरण प्रणालियों की समीक्षा करने में सक्षम बनाया जा सके। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि जल सेवा मूल्यांकन को सामुदायिक स्वामित्व पर आधारित स्व-मूल्यांकन प्रणाली के रूप में परिकल्पित किया गया है।
केंद्र के निर्देशों के अनुसार, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) प्रमोद कुमार ने ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारियों (बीडीपीओ) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पंचायतें जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए मूल्यांकन कार्य, विशेष रूप से पेयजल व्यवस्था से संबंधित जानकारी को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अद्यतन करें।
इस बैठक में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कार्यकारी अभियंता जितेंद्र हुड्डा समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। हुड्डा ने कहा, “जल सेवा मूल्यांकन को सामुदायिक स्वामित्व पर आधारित स्व-मूल्यांकन प्रणाली के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसका उद्देश्य गांवों को अनियमित और महंगे तृतीय-पक्ष सर्वेक्षणों पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक रूप से अपनी जल सेवा वितरण प्रणालियों की समीक्षा करने में सक्षम बनाना है।”
इस मूल्यांकन के अंतर्गत, घरों में नल के पानी के कनेक्शन की स्थिति, पेयजल स्रोत, पाइपलाइन आधारित आपूर्ति प्रणाली, पेयजल शुल्क वसूली और जल की गुणवत्ता जैसे पहलुओं का आकलन किया जाएगा। इससे गांव की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप जल प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिलेगी।
डीडीपीओ ने बीडीपीओ को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा बैठकों का आयोजन सुनिश्चित करें ताकि मूल्यांकन को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा सके।

