June 20, 2026
Himachal

राज्यपाल ने शिमला में कलाकृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

The Governor inaugurated an exhibition of artworks in Shimla.

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने “कांगड़ा लघुचित्रों में लोक और ग्रामीण चित्रण: एक स्वदेशी भारतीय कला परिप्रेक्ष्य” विषय पर आयोजित कला शिविर के दौरान निर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने आज यहां भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान (IIAS) में नवस्थापित कला दीर्घा का भी उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्यता की सच्ची पहचान केवल उसकी आर्थिक समृद्धि में ही नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक गुणवत्ता, रचनात्मक चेतना और विरासत के प्रति सम्मान में निहित होती है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी महज चित्रों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है।

इस महत्वपूर्ण पहल के लिए आईआईएएस को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि संस्थान लंबे समय से राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान, बौद्धिक चिंतन और चर्चा का अग्रणी केंद्र रहा है। उन्होंने कहा, “भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता अत्यंत सराहनीय है।” उन्होंने आगे कहा कि संस्थान ने सफलतापूर्वक एक ऐसा साझा मंच प्रदान किया है जहां विद्वान, कलाकार, शिल्पकार और छात्र परंपरा और ज्ञान के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर सकते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय कला की नींव केवल सौंदर्यशास्त्र पर ही नहीं, बल्कि ज्ञान, आध्यात्मिकता, लोक जीवन और सांस्कृतिक स्मृति पर भी टिकी है। उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति, लोककथाओं, पवित्र ग्रंथों, त्योहारों और रोजमर्रा के जीवन से प्रेरित होकर भारतीय कलाकारों ने ऐसी कृतियों की रचना की है जो पीढ़ियों को जोड़ती हैं और समाज को उसकी सांस्कृतिक नींव से जोड़े रखती हैं।

कांगड़ा लघु चित्रकला परंपरा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की महान कला परंपराओं में इसका एक विशिष्ट स्थान है। उन्होंने कहा, “पहाड़ी चित्रकला शैली की यह परिष्कृत अभिव्यक्ति राजा संसार चंद के संरक्षण में अपने चरम पर पहुंची। इसकी कोमल रेखाएं, जटिल ब्रशवर्क, रंगों का सामंजस्यपूर्ण प्रयोग, मनमोहक प्राकृतिक दृश्य और मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण इसे विश्व की सर्वश्रेष्ठ चित्रकला परंपराओं में स्थान दिलाता है।”

सभा का स्वागत करते हुए, आईआईएएस के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कला शिविर को अकादमिक विद्वत्ता और जीवंत कलात्मक परंपराओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अभिनव पहल के रूप में वर्णित किया।

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