हरियाणा सरकार ने एक महत्वाकांक्षी डिजिटल परिवर्तन कार्यक्रम के साथ अपने राजस्व सुधारों में तेजी लाई है, जिसमें पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 का जल्द ही शुभारंभ और लंबित भूमि सीमांकन मामलों को निपटाने के लिए एक राज्यव्यापी अभियान शामिल है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों में उन्नत पंजीकरण प्रणाली के चरणबद्ध कार्यान्वयन की तैयारी के साथ-साथ राजस्व अधिकारियों के लिए व्यापक क्षमता-निर्माण कार्यक्रम शुरू किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जिलावार कार्यान्वयन से निर्बाध सार्वजनिक सेवाएं सुनिश्चित होंगी और मौजूदा पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 1.0 प्लेटफॉर्म से नए प्लेटफॉर्म पर परिवर्तन के दौरान होने वाली असुविधा कम से कम होगी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने विस्तार से बताते हुए कहा, “पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 को एक उन्नत डिजिटल ढांचे के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य शून्य भौतिक कागजी कार्रवाई के साथ संपूर्ण ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकरण प्रणाली का आधुनिकीकरण करना है।”
यह नया प्लेटफॉर्म ऑनलाइन आवेदन जमा करने, दस्तावेजों को डिजिटल रूप से अपलोड करने, आधार-आधारित प्रमाणीकरण, ई-हस्ताक्षर, शुल्क का ऑनलाइन भुगतान, वास्तविक समय सत्यापन, सुरक्षित डेटा भंडारण और स्वचालित कार्यप्रवाह प्रबंधन की सुविधा प्रदान करेगा।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि उन्नत प्रणाली से सरकारी कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से जाने पर नागरिकों की निर्भरता काफी कम हो जाएगी, मैन्युअल हस्तक्षेप न्यूनतम होगा, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार होगा और सेवाओं की डिलीवरी तेज होगी। उन्होंने कहा, “इस पहल से शासन की दक्षता में मजबूती आने के साथ-साथ व्यापार करने में आसानी होगी और नागरिकों को एक सहज, नागरिक-केंद्रित पंजीकरण अनुभव प्राप्त होगा।”

