पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने फिरोजपुर के एसएसपी से अभियोजन पक्ष के गवाहों के रूप में नामित पुलिस अधिकारियों के निचली अदालत के समक्ष बयान देने के लिए पेश न होने पर स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ ने यह भी निर्देश दिया कि ड्रग्स मामले में आदेश की एक प्रति सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी जाए।
न्यायमूर्ति वशिष्ठ ने कहा, “यह निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रति फिरोजपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजी जाए, ताकि वे इस बात का स्पष्टीकरण दर्ज करा सकें कि अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में नामित पुलिस अधिकारी निचली अदालत के समक्ष गवाही देने के लिए क्यों उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इस आदेश की एक प्रति पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भी सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए।”
यह पीठ फिरोजपुर के मखु पुलिस स्टेशन में दर्ज ड्रग्स मामले में नियमित जमानत देने की मांग वाली दो जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। न्यायालय के समक्ष पेश होते हुए वकील ने तर्क दिया कि दोनों याचिकाकर्ता लगभग एक वर्ष, सात महीने और ग्यारह दिनों से जेल में थे।
जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए, राज्य के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के संयुक्त सचेत कब्जे से 520 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी, जो वाणिज्यिक मात्रा के दायरे में आती है। “दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इसलिए वे इस मामले में नियमित जमानत की रियायत के हकदार नहीं हैं। तदनुसार, दोनों याचिकाओं को खारिज करने की प्रार्थना की गई है,” पीठ ने टिप्पणी की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति वशिष्ठ ने कहा कि उच्च न्यायालय आम तौर पर जमानत की याचिका पर विचार करने के लिए दो साल के कारावास को प्रासंगिक कारकों में से एक मानता है। “हालांकि, वर्तमान मामले में, यह न्यायालय इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि कई मौकों पर न तो अभियोजन पक्ष के गवाह निचली अदालत के समक्ष गवाही देने के लिए पेश हुए और न ही जेल अधिकारियों द्वारा पेश किए गए याचिकाकर्ता,” पीठ ने जोर दिया।
न्यायमूर्ति वशिष्ठ ने आगे कहा कि याचिकाकर्ताओं को अनिश्चित काल के लिए सलाखों के पीछे रखना, विशेष रूप से तब जब मुकदमा अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहा था, किसी भी उपयोगी उद्देश्य को पूरा नहीं करेगा। सभी परिस्थितियों, याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रकृति और कारावास की अवधि को ध्यान में रखते हुए…
उनके द्वारा झेली गई परिस्थितियों और ध्यान में रखे गए कारकों को देखते हुए, न्यायालय इस मामले में दोनों याचिकाकर्ताओं को नियमित जमानत की रियायत देना उचित समझता है,” न्यायालय ने निर्देश दिया।


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