पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को पीजीआईएमएस, रोहतक के निदेशक के रूप में तीन साल के लिए फिर से नियुक्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है, और 65 वर्ष की निर्धारित आयु सीमा से परे उनके पद पर बने रहने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया है।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने शुक्रवार को डॉ. अनिल पन्निक्कर द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें पुनर्नियोजन के लिए परिस्थितियों और कानूनी औचित्य को स्पष्ट किया गया हो।
न्यायालय ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह लागू नियमों और कानूनों के अनुसार, 65 वर्ष से कम आयु के किसी उपयुक्त व्यक्ति को निदेशक का प्रभार सौंपकर तत्काल अंतरिम व्यवस्था करे, ताकि संस्थान के प्रशासन को कोई नुकसान न हो।
राज्यपाल प्रो. आशीष कुमार घोष ने विश्वविद्यालय के नियमों की धारा 3(1)(ई) के तहत 65 वर्ष की आयु सीमा में छूट देते हुए, डॉ. सिंघल को तत्काल प्रभाव से तीन वर्ष के लिए निदेशक के पद पर पुनः नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि यह निर्णय अवैध और मनमाना था।
याचिका के अनुसार, डॉ. सिंघल को शुरू में नवंबर 2024 में एक नियमित पदाधिकारी की नियुक्ति लंबित रहने तक पद का कार्यवाहक प्रभार दिया गया था और विश्वविद्यालय ने विज्ञापन के माध्यम से नियमित भर्ती शुरू की थी, जिसमें अधिकतम आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई थी, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि 31 जुलाई, 2026 को 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर, डॉ. सिंघल विश्वविद्यालय के नियमों के अनुच्छेद 3 (1) (ई) के तहत पद पर बने रहने के लिए अपात्र हो गए, जो कि शेष कार्यकाल की परवाह किए बिना, 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर पद की समाप्ति अनिवार्य करता है, बिना कोई छूट प्रदान किए।
कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया, अधिकारी प्रशासनिक आदेश के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया से विचलित नहीं हो सकते। न्यायालय ने आगे कहा कि कार्यभार ग्रहण करने से उस नियुक्ति को वैधता नहीं मिल सकती जिसे लागू कानून के प्रावधान अनुमति नहीं देते।
न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को पुनर्नियुक्ति का आधार, आयु सीमा में छूट प्रदान करने वाले किसी विशिष्ट प्रावधान/नियम, सक्षम प्राधिकारी का विवरण, छूट प्रदान करने का तरीका और इस संबंध में राज्य सरकार की सिफारिश बताते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले की सुनवाई 25 नवंबर को होगी।


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