हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार की 12 मार्च की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी है जिसमें राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर रखा गया था।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया यह पाया कि अधिसूचना “कानून के किसी भी अधिकार के बिना” और आरटीआई अधिनियम की धारा 24 के विपरीत प्रतीत होती है।
न्यायालय ने कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24(4) केवल राज्य सरकार द्वारा स्थापित “खुफिया एवं सुरक्षा संगठनों” को ही छूट प्रदान करती है। हालांकि, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो को भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा आईपीसी प्रावधानों सहित विभिन्न कानूनों के तहत अपराधों की जांच के लिए गठित एक सरकारी विभाग माना गया, न कि कोई खुफिया या सुरक्षा संगठन।
आरटीआई अधिनियम की धारा 8(एच) पर राज्य की निर्भरता को खारिज करते हुए, पीठ ने स्पष्ट किया कि धारा 8 केवल विशिष्ट सूचनाओं के प्रकटीकरण से छूट प्रदान करती है जो जांच या अभियोजन में बाधा डाल सकती है, लेकिन सरकार को किसी विभाग को आरटीआई अधिनियम के दायरे से पूरी तरह से बाहर करने का अधिकार नहीं देती है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि संगठनों को केवल धारा 24 के दायरे में ही सख्ती से बाहर रखा जा सकता है।
तदनुसार, न्यायालय ने अगली सुनवाई की तारीख तक विवादित अधिसूचना के संचालन पर रोक लगा दी और मामले को 24 जून को विचार के लिए सूचीबद्ध किया।

