एआईसीसी प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने शुक्रवार को अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि राज्य के सेब उत्पादकों के हितों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क कम करने से राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है, जो बागवानी पर बहुत अधिक निर्भर है। सस्ते आयातित सेबों की आमद से कीमतें गिरेंगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और स्थानीय किसानों को भारी नुकसान होगा।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पारित एक प्रस्ताव का जिक्र करते हुए राठौर ने मीडियाकर्मियों से कहा कि यह कदम महज प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार को नीति निर्माण में किसानों के हितों को प्राथमिकता देने का कड़ा संदेश देता है। उन्होंने उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों से एकता का आह्वान करते हुए उनसे भी इसी तरह के प्रस्ताव पारित करने की अपील की ताकि वे सामूहिक रूप से केंद्र पर दबाव बना सकें।
राठौर ने कहा कि भारत को अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए, और इस बात पर जोर दिया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में किसानों और बागवानों के हित सर्वोपरि रहने चाहिए।
इसी बीच, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति के अध्यक्ष के रूप में राठौर ने पार्टी के आंतरिक अनुशासन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी की ताकत नेताओं और कार्यकर्ताओं के संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर काम करने पर निर्भर करती है। राठौर ने कहा कि वे बाहरी दबाव में काम नहीं करते और सभी निर्णय पार्टी के हितों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होंगे।
उन्होंने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि कोई भी विधायक, पदाधिकारी या पार्टी नेता जो संगठनात्मक मामलों में हस्तक्षेप करता है या पार्टी मंचों के बाहर सार्वजनिक रूप से व्यक्तिगत विचार व्यक्त करता है, उसे अनुशासनहीनता माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

