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झारखंड विधानसभा में अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा, भाजपा विधायकों ने सरकार को घेरा

The issue of corruption in zonal offices was raised in the Jharkhand Assembly, BJP MLAs surrounded the government.

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को अंचल कार्यालयों की कार्यप्रणाली, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में देरी और कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा सदन में जोरदार ढंग से उठाया गया। भाजपा विधायकों ने अंचल अधिकारियों (सीओ) पर लापरवाही और बिना लेन-देन काम नहीं होने के आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा।

कोडरमा की भाजपा विधायक नीरा यादव ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वर्ष 2022 से लागू सुओ-मोटो दाखिल-खारिज सिस्टम जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं दिख रहा है। जमीन निबंधन के बाद भी दाखिल-खारिज कराने में लोगों को भारी परेशानी हो रही है। आम नागरिकों और छात्रों को जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्र लेने के लिए बार-बार अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने बच्चों के प्रमाण पत्र जारी करने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने की मांग की।

रांची के भाजपा विधायक सीपी सिंह ने इस मुद्दे पर तल्ख तेवर अपनाते हुए राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ से सीधा सवाल किया। उन्होंने कहा, “मंत्री बनने से पहले आप भी विधायक रहे हैं। कलेजे पर हाथ रखकर बताइए, क्या आपको नहीं पता कि क्या हो रहा है? हम विधायकों का आधा दिन सीओ कार्यालय और थाना की शिकायतें सुलझाने में ही गुजर जाता है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही प्लॉट पर बार-बार म्यूटेशन होना व्यवस्था की विफलता और निर्लज्जता की हद है। सीपी सिंह ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी भी कार्यालय में आम लोगों को घूस न देनी पड़े।

बरही के भाजपा विधायक मनोज यादव ने भी आरोप लगाया कि अंचल अधिकारी के कार्यालय में बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं होता। विधायकों के आरोपों पर मंत्री दीपक बिरुआ ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य में 2011 से सेवा का अधिकार अधिनियम लागू है, जिसके तहत प्रत्येक सेवा के लिए समय सीमा तय है।

उन्होंने कहा कि सरकार सेवा देने के लिए कटिबद्ध है। यदि किसी अंचल अधिकारी द्वारा सेवा अधिकार का उल्लंघन किया जाता है, तो जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि बच्चों के जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्र जैसे मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए विभाग की ओर से एक बार फिर सख्त आदेश जारी किए जाएंगे।

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