लुधियाना स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एचडीएफसी बैंक को शहर के एक निवासी के उस बैंक खाते को तुरंत अनफ्रीज करने का निर्देश दिया है, जो मात्र 2,038 रुपये के विवादित साइबर धोखाधड़ी लेनदेन के कारण अक्टूबर 2023 से अवरुद्ध था। अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत वाली समिति ने बैंक को हिम्मत सिंह नगर निवासी शिकायतकर्ता गुरप्रीत सिंह को संयुक्त मुआवजे और लागत के रूप में 25,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
शिकायतकर्ता 2017 से एचडीएफसी बैंक में वेतन बचत खाता चला रहा था और विभिन्न वित्तीय संस्थानों को ऋण की किस्तों का भुगतान करने के लिए भी इस खाते का उपयोग कर रहा था। शिकायत के अनुसार, उन्होंने किश्तों के भुगतान के लिए खाते में पर्याप्त राशि बनाए रखी थी। हालांकि, जब किश्तें डेबिट नहीं हुईं और जुर्माना लगाया गया, तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया और पता चला कि उनका खाता फ्रीज कर दिया गया है।
शिकायतकर्ता ने बैंक से स्पष्टीकरण मांगा और उसके बाद 6 अक्टूबर, 2023 को खाता अनफ्रीज करने के लिए आवेदन किया। बाद में उन्हें सूचित किया गया कि गुजरात के एक तीसरे व्यक्ति ने कथित तौर पर डिफ़ॉल्ट किया था और विवादित राशि उनके खाते में जमा कर दी गई थी, जिसके परिणामस्वरूप खाता फ्रीज हो गया था। शिकायतकर्ता ने किसी भी प्रकार के डिफ़ॉल्ट करने या किसी आपराधिक कार्यवाही में शामिल होने से इनकार किया।
एचडीएफसी बैंक ने अपने जवाब में कहा कि गुजरात के सूरत शहर स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा धोखाधड़ी वाले लेनदेन का पता चलने के बाद खाता ब्लॉक कर दिया गया था। बैंक ने यह भी कहा कि गुजरात पुलिस के निर्देशों पर खाता ब्लॉक किया गया था और सेवा में किसी भी प्रकार की कमी से इनकार किया।
कार्यवाही के दौरान, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि विवादित लेन-देन वास्तविक था और यह उस व्यक्ति द्वारा लिए गए ऋण का पुनर्भुगतान था जिसने पहले उससे ऋण लिया था। बैंक के जवाब में कुल विवादित राशि 2,038 रुपये बताई गई।
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता को अक्टूबर 2023 से विवादित छोटी राशि के कारण अपने खाते के उपयोग से वंचित रखा गया था। आयोग ने गौर किया कि शिकायतकर्ता ने लेन-देन का स्पष्टीकरण दिया था और बैंक से सूरत स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इस मामले को उठाने का अनुरोध किया था, लेकिन बैंक ने इसके बजाय प्रवर्तन एजेंसी द्वारा रोक हटाने का इंतजार किया।
आयोग ने आगे पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि शिकायतकर्ता को कोई पूर्व सूचना दी गई थी। कथित सूचना के साथ न तो एफआईआर संलग्न थी और न ही प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता को आरोपी बनाया गया था। आयोग ने माना कि बैंक अधिकतम 2,038 रुपये के अनुपात में आंशिक ग्रहणाधिकार लगा सकता था, न कि पूरे खाते को अवरुद्ध कर सकता था।
आदेश में उद्धृत पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के हालिया निर्णयों पर भरोसा करते हुए, आयोग ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में पूरे खाते को फ्रीज रखना मनमाना और असंगत था।
बैंक को निर्देश दिया गया है कि आदेश प्राप्त होते ही खाता तुरंत अनफ्रीज कर दिया जाए। ऐसा न करने पर आदेश की तिथि से लेकर वास्तविक अनुपालन तक प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो अधिकतम 1 लाख रुपये तक होगा। 25,000 रुपये का मुआवजा और लागत 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।

