September 25, 2026
Himachal

हिमाचल प्रदेश एनजीटी ने सिरमौर जिले में ‘अवैध’ खनन का संज्ञान लिया

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में चूना पत्थर और नदी तल के खनिजों के अवैध, अनियमित और अवैज्ञानिक खनन के आरोपों का गंभीर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जिले में कोई भी अवैध खनन न हो।

नाथू राम चौहान बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य के मामले की सुनवाई राष्ट्रीय न्यायिक परिषद (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। न्यायाधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर, 2026 को निर्धारित की है।

आवेदक ने जिले के कफोटा, सतौन, राजबन, पौंटा साहिब, संगराह और शिलाई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चूना पत्थर के खनन और पत्थर तोड़ने वाली मशीनों के संचालन का आरोप लगाया है, जो भूवैज्ञानिक रूप से चूना पत्थर से समृद्ध है। याचिका में 18 अगस्त, 2026 को कफोटा तहसील के कामराऊ के पास बागनाधर में भीमगोडा चूना पत्थर खदान में हुए भीषण भूस्खलन में अवैज्ञानिक और अवैध खनन की कथित भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है।

न्यायाधिकरण के समक्ष लगाए गए आरोपों के अनुसार, इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई। याचिकाकर्ता ने आगे दावा किया कि मृतकों के परिवारों को केवल 20,000 रुपये का मुआवजा दिया गया। आवेदक ने आरोपों को प्रमाणित करने के लिए समाचार रिपोर्टों, तस्वीरों और अन्य सामग्रियों पर भरोसा किया, जिनमें तिथियों और भौगोलिक निर्देशांकों वाले दस्तावेज भी शामिल थे।

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