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डिजिटल दौर में संगीत की असली चुनौती फोकस बनाए रखना है: श्रेया घोषाल

The real challenge of music in the digital age is to maintain focus: Shreya Ghoshal

11 मई । आज की म्यूजिक इंडस्ट्री तेजी से बदलते डिजिटल दौर से गुजर रही है। कलाकारों के लिए अवसर के साथ मानसिक दबाव भी उतना ही बढ़ गया है। इसी बदलते माहौल पर पांच बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं मशहूर प्लेबैक सिंगर श्रेया घोषाल ने अपनी राय रखी।

उन्होंने कहा कि आज के समय में संगीत बनाना चुनौती बन चुका है, जहां कलाकार को हर समय खुद को साबित करना पड़ता है।

बात करते हुए श्रेया घोषाल ने कहा, ”आज के समय में फॉलोअर्स, व्यूज, स्ट्रीमिंग नंबर और सोशल मीडिया एल्गोरिदम जैसे पहलू कलाकार का फोकस कई हिस्सों में बांट देते हैं। जब कोई कलाकार लगातार इन आंकड़ों के बारे में सोचने लगता है, तो वह अपने असली मकसद से थोड़ा दूर हो सकता है। इस डिजिटल दौर में असली चुनौती अपने फोकस को बनाए रखना है।”

उन्होंने कहा, ”मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि जब मैंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब यह डिजिटल दबाव नहीं था। उस समय संगीत का आधार केवल श्रोता और कलाकार के बीच भावनात्मक जुड़ाव था। लोग किसी गाने को उसके सुर, शब्द और भावना के आधार पर पसंद करते थे, न कि व्यूज या लाइक्स के आधार पर। उस दौर में संगीत का असली महत्व उसकी आत्मा में था और कलाकार उसी जुड़ाव के जरिए आगे बढ़ते थे।”

उन्होंने आगे कहा, ”आज के समय में प्लेटफॉर्म्स ने कलाकारों को बहुत बड़ा मंच दिया है। अब कोई भी गायक या संगीतकार दुनिया भर के श्रोताओं तक आसानी से पहुंच सकता है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ यह जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि कलाकार लगातार नया और बेहतर काम करे। आज के समय में खुद को लगातार अपडेट रखना और दर्शकों से जुड़े रहना बहुत जरूरी हो गया है।”

श्रेया घोषाल ने युवा कलाकारों की सराहना करते हुए कहा, ”आज की पीढ़ी बहुत मेहनती और रचनात्मक है। वे किसी की नकल करने के बजाय अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह सकारात्मक बदलाव है। आज के युवा कलाकार अपने आसपास के माहौल, अपने शिक्षकों और पुराने महान कलाकारों से प्रेरणा लेते हैं, लेकिन उसे अपने तरीके से ढालते हैं।”

बातचीत में उन्होंने कहा, ”सीखने की प्रक्रिया कलाकार के जीवन में कभी खत्म नहीं होती। चाहे कोई कलाकार कितना भी अनुभवी क्यों न हो, हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है। मैं खुद भी हर मुलाकात और हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखती रहती हूं।”

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