सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पहलवान विनेश फोगाट को चयन परीक्षणों में भाग लेने की अनुमति देने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ भारतीय कुश्ती महासंघ की याचिका बाद के घटनाक्रमों के मद्देनजर निष्फल हो गई है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और अरविंद कुमार की पीठ ने उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि इस न्यायालय को आदेश में दिए गए निष्कर्षों और टिप्पणियों को दोहराने वाला नहीं माना जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि सभी मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डीएन गोबुरधुन ने कहा कि फोगाट को चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकीं।
वरिष्ठ वकील ने पीठ को बताया, “वह सफल तो नहीं हुई, लेकिन उसने वहां खूब हंगामा मचाया।”
पीठ ने उनसे कहा कि यह मुद्दा अब निष्फल हो गया है।
गोबुरधुन ने कहा कि उच्च न्यायालय ने संघ के निर्णयों के संबंध में कुछ टिप्पणियां की थीं और उन्हें “दुर्भावनापूर्ण” और “निंदनीय” करार दिया था।
वरिष्ठ वकील ने कहा, “ये सभी टिप्पणियां खारिज करनी होंगी क्योंकि मामला एकल पीठ के समक्ष लंबित है।”
इसके बाद शीर्ष अदालत ने सवालों को अनुत्तरित छोड़ दिया और याचिका को निरर्थक मानते हुए खारिज कर दिया।
29 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने फोगाट को एशियाई खेल 2026 के लिए 30 और 31 मई को होने वाले चयन परीक्षणों में भाग लेने की अनुमति दी।
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने 22 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें फोगाट को चयन परीक्षणों में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।


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