कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. बी.आर. अंबेडकर अध्ययन केंद्र ने नई दिल्ली स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम के बीएपीएस स्वामीनारायण अनुसंधान संस्थान और कुरुक्षेत्र स्थित दिव्या कुरुक्षेत्र मिशन के सहयोग से सोमवार को ‘युवा शक्ति, सोशल मीडिया और आध्यात्मिक अनुशासन: चुनौतियां, समाधान और राष्ट्र निर्माण में भूमिका’ विषय पर एक व्याख्यान सत्र का आयोजन किया।
इस अवसर पर, केयू के कुलपति सोम नाथ सचदेवा ने कहा कि युवाओं को डिजिटल प्रौद्योगिकी का सकारात्मक और रचनात्मक रूप से उपयोग करना चाहिए, क्योंकि उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता और तकनीकी क्षमताएं एक मजबूत और विकसित राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को जानकारी साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए और अपनी डिजिटल आदतों पर नियंत्रण रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें शिक्षा, व्यक्तिगत विकास और सामाजिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।
कुरुक्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत और श्रीमद् भगवद् गीता की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कुलपति ने कहा कि इनसे आत्मसंयम और इंद्रियों पर नियंत्रण के बहुमूल्य पाठ प्राप्त होते हैं। नई दिल्ली स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम के युवा निदेशक और मुख्य वक्ता धर्ममूर्ति स्वामी ने कहा कि सोशल मीडिया मनोरंजन के साधन से कहीं अधिक विकसित हो चुका है और लोगों के विचारों, इच्छाओं, प्राथमिकताओं और व्यवहार को तेजी से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि असली चिंता केवल समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि ऑनलाइन सामग्री का लोगों की सोच, आकांक्षाओं और जीवन लक्ष्यों पर पड़ने वाला प्रभाव भी है।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी ऊर्जा को शिक्षा, आत्म-विकास, सकारात्मक सोच और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति की ओर लगाएं। नई दिल्ली स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम के ज्ञानमंडल दास ने बच्चों को मोबाइल फोन की लत से बचाने के लिए अच्छे मूल्यों और सत्संग को अनिवार्य बताया। उन्होंने लोगों को आध्यात्मिकता, सुदृढ़ नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कैथल के मुंद्री स्थित महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति राजेंद्र कुमार अनायथ ने युवाओं से डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को पहचानने और सप्ताह में कम से कम एक दिन ‘मीडिया उपवास’ करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि उस दिन मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट से दूर रहकर स्वयं के लिए समय निकालें।
विशिष्ट अतिथि, केयू के रजिस्ट्रार वीरेंद्र पाल ने कहा कि आध्यात्मिकता और राष्ट्र निर्माण से संबंधित कार्यक्रम युवाओं में सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की भावना को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। डॉ. बी.आर. अंबेडकर अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रीतम सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद, समर्थ रामदास और स्वामी दयानंद जैसे प्रख्यात आध्यात्मिक व्यक्तित्वों की विरासत से प्रेरित होकर, कई संत अपना जीवन समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उनके प्रयासों ने युवाओं का मार्गदर्शन करने, जागरूकता फैलाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

