यमुनानगर जिला प्रशासन ने अवैध खनन पर अपनी कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है, जिसमें संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ी हुई निगरानी, समन्वित प्रवर्तन और त्वरित कार्रवाई पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
जिला सचिवालय में उपायुक्त प्रीति की अध्यक्षता में हुई हालिया समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। उपायुक्त ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अवैध खनन की निगरानी और रोकथाम के लिए घनिष्ठ समन्वय से काम करने का निर्देश दिया।
बैठक के दौरान यह खुलासा हुआ कि सरकार ने पिछले एक महीने (12 जून से 16 जुलाई तक) में जिले में वैध खनन (खनन अनुबंधों के लिए जमा किश्तों के माध्यम से) और अवैध खनन गतिविधियों (अवैध गतिविधियों के लिए जब्त किए गए वाहनों पर लगाए गए जुर्माने के माध्यम से) से 2.55 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है। इसी अवधि के दौरान, अधिकारियों ने अवैध खनन गतिविधियों में कथित रूप से शामिल 62 वाहन जब्त किए हैं।
डीसी प्रीति ने कहा कि प्रशासन केवल प्रवर्तन अभियानों पर ही निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी तंत्र को भी मजबूत करेगा। डीसी प्रीति ने कहा, “संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई जाएगी, साथ ही खनन, पुलिस, परिवहन, सिंचाई, पंचायत और राजस्व विभागों तथा प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों वाली संयुक्त टीमें अवैध खनन की सूचना मिलते ही समन्वित अभियान चलाएंगी।”
बैठक के दौरान, अधिकारियों को समय पर तथ्यात्मक निरीक्षण और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया ताकि प्रशासन नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा कर सके और खनन विरोधी अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित कर सके।
बैठक में फर्जी ई-ट्रांजिट पास से जुड़े मामलों को एक बड़ी चुनौती के रूप में पहचाना गया। अधिकारियों को दस्तावेजों की पूरी तरह से जांच करने, अनियमितताओं के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, उल्लंघन में शामिल वाहनों को जब्त करने और विभागीय कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।


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