चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (सीएसकेएचपीकेवी), पालमपुर में वैज्ञानिक बांस की खेती पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय बांस मिशन के अंतर्गत बुनियादी विज्ञान महाविद्यालय के जीवविज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा विस्तार शिक्षा निदेशालय के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य भर के किसानों के लिए बांस की खेती को एक टिकाऊ और लाभदायक आजीविका विकल्प के रूप में बढ़ावा देना था।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों से तीस किसानों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान, विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक बांस की खेती, नर्सरी प्रबंधन, रोपण तकनीक, कीट और रोग प्रबंधन, मूल्यवर्धन और राष्ट्रीय बांस मिशन के अंतर्गत विपणन के अवसरों पर व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की बांस नर्सरी में प्रसार विधियों, नर्सरी प्रबंधन प्रथाओं और वैज्ञानिक खेती तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त हुआ।
समापन समारोह में विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे, जबकि बुनियादी विज्ञान महाविद्यालय के डीन डॉ. राजन कटोच विशिष्ट अतिथि थे। डॉ. लव भूषण ने प्रशिक्षण प्रभारी के रूप में कार्य किया और राष्ट्रीय बांस मिशन परियोजना की प्रधान शोधकर्ता डॉ. राधिका शर्मा ने कार्यक्रम का समन्वय किया।
डॉ. शर्मा और डॉ. कटोच ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए किसानों को वैज्ञानिक बांस की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके और साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिल सके। उन्होंने जीव विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा बांस की खेती को बढ़ावा देने और कृषि समुदायों में इसके आर्थिक और पारिस्थितिक लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने के प्रयासों की सराहना भी की।
कार्यक्रम का समापन सभी 30 प्रशिक्षार्थियों को सहभागिता प्रमाण पत्र, बांस के पौधे और अध्ययन सामग्री के वितरण के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना की और इसे राज्य में टिकाऊ बांस-आधारित आजीविका को बढ़ावा देने और वैज्ञानिक बांस की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।

