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थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, हाईकोर्ट के आदेश को बताया संतुलित

Thiruparankundram hill dispute: Supreme Court refuses to intervene, calls High Court order balanced

तमिलनाडु के मदुरै स्थित थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी से जुड़े विवादित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें नल्लिथोप्पू क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय को केवल रमजान और बकरीद के अवसर पर ही नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश संतुलित प्रतीत होता है और इसमें दखल देने की कोई आवश्यकता नहीं है।

बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के नल्लिथोप्पू इलाके में नमाज़ की अनुमति केवल दो प्रमुख इस्लामी त्योहारों, रमजान और बकरीद, तक सीमित कर दी थी। इसके अलावा, कोर्ट ने इस क्षेत्र में जानवरों की कुर्बानी पर भी रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले को स्थानीय निवासी और याचिकाकर्ता एम इमाम हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट और प्रिवी काउंसिल पहले ही यह मान चुके हैं कि नल्लिथोप्पू की लगभग 33 सेंट भूमि मुस्लिम समुदाय की है। उन्होंने तर्क दिया कि भूमि के स्वामित्व को स्वीकार किए जाने के बावजूद हाईकोर्ट ने गलत तरीके से नमाज़ की अनुमति को केवल रमज़ान और बकरीद तक सीमित कर दिया, जो समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर अनुचित प्रतिबंध है।

हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश विभिन्न पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित तरीके से दिया गया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा।

गौरतलब है कि पूर्व में तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दरगाह में होने वाली प्रथाओं से संबंधित एक कानूनी मुद्दा सामने आया था। अनुष्ठानों के दौरान पशु बलि और मांसाहारी भोजन परोसने के आरोपों के बीच, मणिकमूर्ति द्वारा दायर एक याचिका के कारण 2 जनवरी को एक सिंगल जज ने अंतरिम निर्देश जारी किए। कोर्ट ने एक आदेश में दरगाह प्रशासन को पशु बलि देने, मांसाहारी भोजन परोसने या पहाड़ी की तलहटी से पहाड़ी की चोटी तक मांस ले जाने से रोक दिया। त्योहार की अवधि के दौरान पशु बलि और मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लागू हैं।

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