दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक रामनीश और दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी वी.के. पांडे के मामले में सजा को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला अक्टूबर 2000 में एक आयकर सेवा (आईआरएस) अधिकारी की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी कथित कार्रवाई से संबंधित है।
कोर्ट ने इस मामले में 18 अप्रैल को दोनों अधिकारियों को मारपीट और आपराधिक अतिक्रमण के आरोपों में दोषी ठहराया था। अब अदालत मंगलवार शाम को इस मामले में सजा सुनाएगी। यह मामला करीब 25 साल पुराने घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है, जिसकी लंबे समय से सुनवाई चल रही थी।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को उस समय 38 दिन तक जेल में रहना पड़ा था और अदालत ने भी माना है कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया था।
वकील ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता को न्याय पाने के लिए 25 साल तक इंतजार करना पड़ा, इसलिए दोषियों को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट को पीड़ित को मुआवजा देने पर भी विचार करना चाहिए। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि दोनों अधिकारी अपनी निजी इच्छा से उस कार्रवाई में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि उस समय की परिस्थितियों में उन्हें जो आदेश दिए गए, उसके अनुसार उन्होंने काम किया।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों अधिकारियों की शिकायतकर्ता से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी और पूरा मामला आधिकारिक कार्रवाई का हिस्सा था। वकील ने यह भी तर्क दिया कि इस केस में करीब 26 साल तक ट्रायल चला है और दोनों अधिकारियों ने विभागीय जांच का भी सामना किया है। उन्होंने अदालत से अपील की कि सजा तय करते समय सभी परिस्थितियों पर दोबारा विचार किया जाए।

