1 अप्रैल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के सांसदों ने चुनाव आयोग की तरफ से गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर बाहरी लोगों को नाम जुड़वा रही है, जिससे विधानसभा चुनाव में मतदान में बेईमानी की जा सके।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के प्रयासों पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में भाजपा के कई कैडर 30,000 से 40,000 फॉर्म-6 के साथ पकड़े गए हैं, जिससे पता चलता है कि ये लोग चुनाव से पहले क्या कर रहे हैं।
मोइत्रा ने कहा, “फॉर्म-6 से कोई नया मतदाता अपने आप को मतदाता सूची में शामिल कर सकता है। अगर एक बूथ में बहुत सारे युवा नए मतदाता बन रहे हैं, तब भी बूथ लेवल एजेंट अधिकतम 50 फॉर्म-6 ही ले सकते हैं। फिर भी हजारों फॉर्म-6 जमा किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र में पांच महीने में 40 लाख नए मतदाता जोड़े गए थे।”
महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग को लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के शीर्ष पदों पर आईपीएस अधिकारियों की तैनाती चुनावी उद्देश्य से की जा रही है।
मोइत्रा ने कहा, “इनका हेड तो उन्हीं के कैडर पर आना चाहिए। दरअसल केंद्र सरकार आईपीएस के जरिए सीएपीएफ का इस्तेमाल करना चाहती है, इसलिए वे हमारे अधिकारियों को हटाकर अपने लोगों को जिम्मेदारी दे रहे हैं।”
इसी मुद्दे पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि 60,000 फॉर्म-6 जमा करने की कोशिश की गई थी, जिसका पार्टी ने विरोध किया। रॉय ने कहा, “हमारे नेता अभिषेक बनर्जी ने इसका विरोध किया और हम वहां कार्यालय के सामने भी विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। हम इस मुद्दे पर लगातार विरोध जारी रखेंगे।”
पश्चिम बंगाल से टीएमसी नेता यूसुफ पठान ने कहा कि राज्य में लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व को पसंद करते हैं। उन्होंने बताया, “दीदी ने महिलाओं, युवाओं और राज्य के विकास के लिए जो काम किए हैं, लोग उन्हें सराहते हैं। दीदी हमेशा यहां के लोगों के लिए लड़ती आई हैं और भविष्य में किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होने देंगी।”

