बाढ़ के खतरे को कम करने और अवैध खनन पर नियंत्रण कड़ा करने के उद्देश्य से एक निर्णायक कदम उठाते हुए, कुल्लू जिला प्रशासन ने सख्त निगरानी तंत्रों द्वारा समर्थित वैज्ञानिक नदी उत्खनन अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
कुल्लू जिले के बहुउद्देशीय हॉल में आज कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। कुल्लू जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अंतर्गत गठित यह समिति बाढ़ नियंत्रण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए नदी तल में खुदाई और खनन गतिविधियों की निगरानी करेगी।
डीसी ने कहा कि यह पहल डेटा-संचालित और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील ढांचे का पालन करेगी, जिसके तहत बाढ़ की संवेदनशीलता के आधार पर ड्रेजिंग क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, साथ ही चयनित स्थलों के उचित राजस्व दस्तावेजीकरण और भू-निर्देशांक सुनिश्चित किए जाएंगे।
वन विभाग के माध्यम से किए जाने वाले पुनर्भरण अध्ययन से यह निर्धारित किया जाएगा कि कितनी मात्रा में सामग्री सुरक्षित रूप से निकाली जा सकती है। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि 3 मीटर की गहराई तक खुदाई की अनुमति देने वाली खनन योजनाओं को उद्योग विभाग द्वारा वैज्ञानिक अनुशंसाओं और स्थल-विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर ही मंजूरी दी जाएगी। बैठक के दौरान, निविदा समिति द्वारा तैयार किए गए निविदा ढांचे के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इन प्रावधानों के आधार पर, हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम आधार मूल्य निर्धारित करेगा और ड्रेजिंग कार्यों के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगा।
अवैध खनन के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए प्रशासन ने खनन स्थलों पर कैमरे लगाने सहित निगरानी के कड़े उपायों की घोषणा की है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी चिन्हित खनन स्थलों का पूरा रिकॉर्ड, तस्वीरों सहित, रखें और उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक को नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करें। प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि किसी भी उल्लंघन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

