June 4, 2026
Entertainment

आज की पीढ़ी के पास हमसे बेहतर संसाधन, वे पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं : सुबोध भावे

Today’s generation has better resources than us, they are working with complete honesty: Subodh Bhave

अभिनेता सुबोध भावे इन दिनों फिल्म ‘श्री बाबा नीब करोरी महाराज’ को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। अभिनेता का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी के पास पुराने समय के मुकाबले बेहतर संसाधन मौजूद हैं और वे उनका अच्छा इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

अभिनेता ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि युवा कलाकारों के पास पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा संसाधन और मौके हैं। उन्होंने कहा, “अगर हमारे जमाने में भी सोशल मीडिया होता, तो शायद हम भी उसका इसी तरह इस्तेमाल करते। युवा कलाकार पूरी ईमानदारी से, अपने ही तरीके से खुद को तलाशने और निखारने की कोशिश कर रहे हैं।”

उनका कहना है कि सोशल मीडिया को किसी भी कला में गिरावट की वजह नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह आज के दौर में हर किसी की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

उन्होंने कहा, “मैं अक्सर देखता हूं कि युवा कलाकार सिर्फ सोशल मीडिया पर वक्त नहीं बिताते, बल्कि वे अभिनय की बारीकियों को सीखने के लिए वर्कशॉप में हिस्सा लेते हैं, दूर-दराज की जगहों पर जाते हैं और खुद को बेहतर बनाने के नए-नए तरीके खोजते हैं।”

सुबोध भावे को फिल्म इंडस्ट्री में व्यावसायिक और कलात्मक सिनेमा के बीच बेहतरीन संतुलन बनाने के लिए जाना जाता है। इसे लेकर उन्होंने युवा कलाकारों को सीख देते हुए कहा, “हर कलाकार का अपना एक अलग सफर होता है और कला को देखने का नजरिया भी अलग होता है। मेरे लिए कमर्शियल और कलात्मक सिनेमा का अंतर कभी मायने नहीं रखता। मैं तो बस ऐसी कहानियां और किरदार चुनता हूं, जो एक अभिनेता के तौर पर मुझे उत्साहित करें।”

जब आईएएनएस ने उनसे सवाल किया, “जब अभिनेता आध्यात्मिक किरदार निभाते हैं, तो दर्शक अक्सर उन्हें असल जिंदगी में भी उसी छवि से जोड़ने लगते हैं। क्या आपको लगता है कि इस वजह से अभिनेता की कोई सामाजिक जिम्मेदारी होती है?”

इस पर सुबोध ने कहा, “मैंने स्क्रीन पर महाराज जी का किरदार पूरी श्रद्धा, प्यार और ईमानदारी से निभाया, लेकिन असल जिंदगी में मैं महाराज जी नहीं हूं। मैं एक अभिनेता हूं और आगे भी कई तरह के किरदार निभाता रहूंगा, जिनमें कुछ विलेन या नकारात्मक भूमिकाएं भी हो सकती हैं।”

उन्होंने अपनी बात समझाते हुए एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया, “मुझे याद है कि एक मशहूर खिलाड़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की टेबल से सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल हटाकर पानी की बोतल रख दी थी। कुछ ही दिनों में कंपनी के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि उनके इस काम से समाज को एक संदेश गया था। इसी तरह, सार्वजनिक हस्तियों को भी अपने प्रभाव का ध्यान रखना चाहिए।”

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