कनॉट प्लेस और उसके आसपास के क्षेत्र में कारोबार करने वाले व्यापारियों ने गुरुवार को कहा कि बार-बार धरना-प्रदर्शन होने के कारण उनके व्यापार पर बुरा असर होता है और कर्मचारियों का वेतन देना एक चुनौती बना जाता है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कनॉट प्लेस में ‘भापे दा होटल’ और ‘मीनार रेस्टोरेंट’ के मालिक आयुष चोपड़ा ने कहा कि जब भी कोई विरोध-प्रदर्शन होता है, तो उससे चार दिन पहले ही व्यावसायिक गतिविधियां बाधित हो जाती हैं, क्योंकि लोग डर जाते हैं और अपने घरों के अंदर ही रहते हैं और वे बाहर नहीं निकलते। विरोध-प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी, चार दिनों तक लोग बाहर जाने से बचते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की वजह से उनके मन में डर बैठ जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि विरोध-प्रदर्शन से काम बिल्कुल खत्म हो जाता है और हमारे खर्च बने रहते हैं, जिसमें किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों का वेतन होता है और इन्हें देना चुनौती बन जाता है।
चोपड़ा ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि विरोध-प्रदर्शन से केवल बड़े व्यापारियों के कारोबार प्रभावित होते हैं बल्कि इससे कई छोटे वेंडर का काम भी कम हो जाता है। साथ ही, उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों को सेंट्रल दिल्ली से बाहर करना चाहिए और उन्हें एक अलग साइट देनी चाहिए।
बंगाली स्वीट हाउस और पेस्ट्री शॉप के मालिक वर्जेश अग्रवाल ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान कारोबार में काफी गिरावट आई और यह सामान्य स्तर के 50 प्रतिशत से भी कम रह गया। तीन-चार दिनों तक ग्राहकों की आवाजाही कम रही और ट्रैफिक पाबंदियों का भी कारोबार पर असर पड़ा।
कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है। इसके चलते पूरी सेंट्रल दिल्ली जमा हो गई है और सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण मार्गों को बंद करना पड़ा था, जिससे बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में काम करने वाले छोटे और बड़े व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ था।


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