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एनसीएससी का दबाव बैंकों को ऋण योजनाओं के अंतर्गत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की जानकारी देनी होगी

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के हस्तक्षेप के बाद, वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने देश भर में राज्य स्तरीय बैंकर समितियों (एसएलबीसी) को प्रमुख ऋण-लिंक्ड योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत की रिपोर्ट देना शुरू करने का निर्देश दिया है।

पंजाब सहित राज्यों को जारी निर्देशों में, एनसीएससी सचिव विवेक कुमार देवांगन ने लिखा था कि एसएलबीसी की रिपोर्ट प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, पीएमईजीपी, पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई और एमएसएमई व्यवसाय ऋण जैसी योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त अनुसूचित जाति परिवारों के हिस्से को प्रतिबिंबित नहीं कर रही हैं।

आयोग ने कहा कि इस डेटा की अनुपस्थिति अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए अनुच्छेद 338(5)(सी) के तहत उसके संवैधानिक जनादेश में बाधा डाल रही है।

पत्र के जवाब में, विभाग ने 5 अक्टूबर को सभी एसएलबीसी और यूटीएलबीसी संयोजकों को निर्देश जारी किए। समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी आवधिक समीक्षा बैठकों में अनुसूचित जाति लाभार्थियों का योजनावार और बैंकवार विवरण शामिल करें, यह जानकारी नियमित रूप से एनसीएससी के साथ साझा करें और 9 अक्टूबर तक विभाग को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

डीएफएस ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्टिंग बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के पास पहले से उपलब्ध डेटा का उपयोग करके की जानी चाहिए ताकि कोई समानांतर रिपोर्टिंग प्रणाली न बने। एसएलबीसी और यूटीएलबीसी को भी 30 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई पर एक और अपडेट भेजने के लिए कहा गया है।

आयोग ने कहा कि इस कदम से अनुसूचित जाति समुदायों को वित्तीय समावेशन के लाभ पहुंचाने में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी। आयोग ने निर्देशों के कार्यान्वयन की बारीकी से निगरानी करने का वचन दिया है।

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