July 11, 2026
National

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बिहार के सीएम ने मेजर रामा राघोबा राणे के स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि दी

Union Minister Nitin Gadkari and the Chief Minister of Bihar paid tribute on the death anniversary of Major Rama Raghoba Rane.

भारत मां के वीर सपूत और सर्वोच्च बलिदान देने वाले सेकेंड लेफ्टिनेंट मेजर रामा राघोबा राणे के स्मृति दिवस पर शनिवार को कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर स्मृति दिवस पर सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “परमवीर चक्र से सम्मानित सेकेंड लेफ्टिनेंट मेजर रामा राघोबा राणे जी के स्मृति दिवस पर उन्हें विनम्र अभिवादन।”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए पोस्ट शेयर किया, “परमवीर चक्र से अलंकृत मां भारती के वीर सपूत मेजर रामा राघोबा राणे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र की रक्षा के लिए उनका अदम्य साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।”

बता दें कि वर्ष 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी जान की परवाह न करते हुए दुश्मन की गोलियों और बारूदी सुरंगों के बीच टैंकों का रास्ता साफ करने वाले इस वीर सपूत को भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र प्रदान किया गया था। उनको जीवित रहते इस सम्मान से सम्मानित किया गया था।

26 जून 1918 को कर्नाटक के करवार जिले के चेंदिया गांव में जन्मे रामा राघोबा राणे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल हुए। इस जंग के बाद इंडियन आर्मी में वे बने रहे। 15 दिसंबर 1947 को उन्होंने बॉम्बे सैपर्स (कोर ऑफ इंजीनियर्स) में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। अप्रैल 1948 में राजौरी पर कब्जा करने के अभियान के दौरान उनकी कंपनी 37 असॉल्ट फील्ड कंपनी को सड़क अवरोधों और खदान क्षेत्रों को साफ करने का जिम्मा सौंपा गया।

8 अप्रैल 1948 को पाकिस्तानी सेना के भारी गोले बरसने के बीच राणे ने 72 घंटे तक लगातार काम किया। दुश्मन की गोलाबारी में उनके दो साथी बलिदान हो गए और पांच अन्य घायल हुए थे, जिनमें खुद राणे भी शामिल थे। घायल अवस्था में भी उन्होंने बारूदी सुरंगें हटाईं, सड़कें साफ कीं और भारतीय टैंकों को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता ने राजौरी मुक्ति में निर्णायक भूमिका निभाई थी।

उनके इस साहस के लिए 8 अप्रैल 1948 को परमवीर चक्र घोषित किया गया। 28 वर्ष की सेवा के बाद 1968 में मेजर के पद से सेवानिवृत्त होने वाले राणे को पांच बार मेंशन इन डिस्पैचेस भी मिला। 11 जुलाई 1994 को पुणे के कमांड अस्पताल में 76 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।

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