January 27, 2026
General News National

ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ यूएस-भारत ने शुरू किया नया संयुक्त तंत्र

US-India launch new joint mechanism against drug trafficking and narco-terrorism

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत ने ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नया संयुक्त तंत्र शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य दोनों देशों की सुरक्षा और समाज को सुरक्षित बनाना है।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक 20 से 21 जनवरी तक वाशिंगटन में हुई।

इस बैठक की शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण नीति कार्यालय की निदेशक सारा कार्टर ने की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और नशे से जुड़े आतंकवाद को खत्म करने को लेकर समान सोच है।

सारा कार्टर ने कहा कि नशे का संकट अब राष्ट्रीय सुरक्षा का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। यह नया कार्य समूह दोनों देशों की साझेदारी का उपयोग कर परिवारों की सुरक्षा करेगा और साथ ही वैध उद्योगों को भी सहयोग देगा।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत नशीले पदार्थों की तस्करी से होने वाले खतरे को रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि इसमें अवैध ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स के डायवर्जन से निपटना भी शामिल है।

क्वात्रा ने कहा कि भारत मजबूत प्रवर्तन और वैध व्यापार को सुविधाजनक बनाने के बीच संतुलन बनाने पर काम कर रहा है, जिसमें कानूनी फार्मास्युटिकल गतिविधि भी शामिल है।

इस वर्किंग ग्रुप का नेतृत्व अमेरिकी पक्ष से एक्टिंग ओएनडीसीपी डिप्टी डायरेक्टर डेबी सेगुइन और भारतीय पक्ष से भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की डिप्टी डायरेक्टर जनरल मोनिका आशीष बत्रा कर रही हैं। दोनों देशों के अधिकारियों ने कहा कि यह समूह ठोस और मापे जा सकने वाले नतीजों पर ध्यान देगा, ताकि नशे के खिलाफ सहयोग को आगे बढ़ाया जा सके।

अमेरिका और भारत ने अवैध नशीले पदार्थों और उन्हें बनाने वाले रसायनों के उत्पादन व तस्करी को खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास तेज करने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों का कहना है कि ये गतिविधियां दोनों देशों के समाज के लिए खतरा हैं।

दोनों सरकारों ने इस समस्या से निपटने के लिए पूरे सरकारी तंत्र के साथ मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

अधिकारियों ने फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डायवर्जन को रोकने के प्रयास देश के नियम-कानूनों के अनुरूप होने चाहिए और इससे वैध उद्योगों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

बयान के अनुसार, यह बैठक हाल के उन संयुक्त अभियानों पर आधारित थी, जिनमें नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को निशाना बनाया गया था। अमेरिकी और भारतीय अधिकारियों ने इन वार्ताओं को वैश्विक नशा समस्या से निपटने के प्रति दोनों देशों की साझा और लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि नया वर्किंग ग्रुप दोनों देशों में सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब दुनिया भर की सरकारें कृत्रिम नशों और रसायनों के दुरुपयोग से बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका-भारत सुरक्षा सहयोग का दायरा बढ़ा है, जिसमें आतंकवाद विरोधी कदम और कानून व्यवस्था से जुड़ा समन्वय भी शामिल है।

Leave feedback about this

  • Service