हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने मंगलवार को पारिस्थितिकी संतुलन के लिए जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर जोर देते हुए इस दिशा में ग्राम वन प्रबंधन समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।
वे डलहौजी वन प्रभाग के अंतर्गत घटशनी ग्राम पंचायत में वन विभाग द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम वन प्रबंधन समितियों और वन अग्नि रोकथाम में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना था।
कार्यक्रम में विभिन्न ग्रामीण वन प्रबंधन समितियों के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भाग लिया।
वन संरक्षण और विस्तार के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए पठानिया ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में पेश किए गए 2025-26 के बजट में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे, जिसका लाभ स्वयं सहायता समूहों, महिला संघों, युवा समूहों और ग्रामीण वन प्रबंधन समितियों को मिलेगा। इस पहल से न केवल स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि राज्य में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
पठानिया ने जोर देकर कहा कि सरकारी जंगल सभी निवासियों की साझा संपत्ति हैं और उनके संरक्षण के लिए समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने स्थानीय लोगों से जंगल में आग लगाने से बचने और ऐसी किसी भी घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को देने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आगामी वनीकरण सत्र के दौरान बड़े पैमाने पर पौधे लगाने को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम वन प्रबंधन समितियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए छाबड़ को प्रथम, कडै को द्वितीय तथा तारागढ़ को तृतीय पुरस्कार दिया गया। वर्ष 2022-23 के लिए छाबड़ को प्रथम, कैल को द्वितीय तथा धुनेरा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
इससे पहले, डलहौजी के डीएफओ रजनीश महाजन ने सम्मान समारोह के महत्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जन सहयोग के बिना वन संसाधनों की रक्षा करना विभाग के लिए एक कठिन कार्य है। हालांकि, डलहौजी वन प्रभाग ने सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया है। चंबा के वन संरक्षक अभिलाष दामोदरन ने वनों में आग को रोकने में जन भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि वन संसाधनों और वन्य जीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। राज्य वन निगम के निदेशक कृष्ण चंद चेला सहित कई अधिकारियों ने भी सभा को संबोधित किया।
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